कूपर कोनोली की शानदार पारी ने बांग्लादेश को ऐतिहासिक क्लीन स्वीप से रोका
कूपर कोनोली के 149 रनों की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज में क्लीन स्वीप से खुद को बचाया
कूपर कोनोली के करियर के पहले शतक ने ऑस्ट्रेलिया को ढाका में एक रोमांचक जीत दिलाई, जिससे बांग्लादेश का अंतिम वनडे में क्लीन स्वीप करने का सपना टूट गया।
ढाका की उमस भरी गर्मी के बीच खिलाड़ियों पर जीत का भारी दबाव था। ऑस्ट्रेलिया के लिए यह तीसरा वनडे सिर्फ सम्मान की बात नहीं थी, बल्कि सीरीज में क्लीन स्वीप की शर्मिंदगी से बचने की चुनौती भी थी। ऐसे में कूपर कोनोली ने मोर्चा संभाला। इस युवा खिलाड़ी ने अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी खेलते हुए 149 रन बनाए और एक मुश्किल लक्ष्य का पीछा करते हुए ऑस्ट्रेलिया को अपमानजनक हार से बचा लिया।
मेजबान बांग्लादेश ने पहले बल्लेबाजी करते हुए तौहीद हृदोय के 83 रनों और लिटन दास व मोसादेक हुसैन के उपयोगी योगदान से 275 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा था। जब ऑस्ट्रेलियाई टीम लक्ष्य का पीछा करने उतरी, तो मैच एकतरफा लग रहा था, लेकिन तभी शरीफुल इस्लाम ने मैच का रुख मोड़ दिया। शरीफुल ने घातक गेंदबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलियाई शीर्ष क्रम को ध्वस्त कर दिया और 48 रन देकर 6 विकेट झटके, जो उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।
धार पर खड़ा मुकाबला
जब दूसरे छोर पर एलेक्स कैरी और मार्नस लाबुशेन जैसे बल्लेबाज पवेलियन लौट रहे थे, तब कोनोली चट्टान की तरह क्रीज पर डटे रहे। ढाका की भीषण गर्मी में मांसपेशियों में खिंचाव (क्रैम्प्स) के बावजूद, उन्होंने 87 गेंदों में अपना पहला वनडे शतक पूरा किया। बांग्लादेश के स्पिन आक्रमण के खिलाफ उनकी सूझबूझ ने रन-रेट को नियंत्रण में रखा, हालांकि एक समय ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 271 रन पर 9 विकेट हो गया था और मैच हाथ से निकलता दिख रहा था।
अंतिम ओवरों में काफी उथल-पुथल रही। 49वें ओवर में मुस्तफिजुर रहमान ने कोनोली को बोल्ड कर मैच में रोमांच भर दिया, जिससे अंतिम छह गेंदों पर ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए दो रनों की दरकार थी। दबाव के बीच एडम ज़म्पा ने तास्किन अहमद की गेंद पर कवर ड्राइव लगाकर टीम को जीत दिलाई। तीन गेंद शेष रहते मिली यह एक विकेट की जीत ऑस्ट्रेलिया की बल्लेबाजी की गहराई और कमजोरी दोनों को दर्शाती है।
यह जीत क्यों मायने रखती है
यह जीत दोनों टीमों के लिए एक आईना है। ऑस्ट्रेलिया के लिए कोनोली के रूप में एक नया भरोसेमंद बल्लेबाज मिलना सकारात्मक संकेत है, जबकि यह सीरीज उपमहाद्वीप की परिस्थितियों में उनकी संघर्षपूर्ण बल्लेबाजी को भी उजागर करती है। यह जीत साबित करती है कि वे दबाव में वापसी कर सकते हैं, लेकिन एक ही खिलाड़ी पर अत्यधिक निर्भरता अभी भी चिंता का विषय है।
बांग्लादेश के लिए, यह हार निराशाजनक जरूर है, लेकिन यह सीरीज घरेलू सरजमीं पर उनकी बढ़ती ताकत को साबित करती है। एक विश्व स्तरीय टीम को अंतिम ओवर तक ले जाना और क्लीन स्वीप के करीब पहुंचना यह दिखाता है कि उनकी गेंदबाजी रणनीति विश्व स्तरीय है। शरीफुल इस्लाम का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि अब घरेलू टीमें क्रिकेट के दिग्गजों से डरती नहीं हैं, बल्कि उन्हें कड़ी टक्कर दे रही हैं।
कबीर शर्मा पॉलिटिकलपीडिया के लिए संस्कृति, तकनीक और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर लिखते हैं।