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चंडीगढ़: डॉग फूड में कीड़े-मकोड़े मिलने पर उपभोक्ता अदालत ने महिला को मुआवजा देने का आदेश दिया

चंडीगढ़: डॉग फूड में 'कीड़े-मकोड़े' मिलने पर अदालत ने कंपनी को मुआवजा देने का निर्देश दिया

द्वारा पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्कप्रकाशित 5 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
चंडीगढ़: डॉग फूड में कीड़े-मकोड़े मिलने पर उपभोक्ता अदालत ने महिला को मुआवजा देने का आदेश दिया
चंडीगढ़: डॉग फूड में कीड़े-मकोड़े मिलने पर उपभोक्ता अदालत ने महिला को मुआवजा देने का आदेश दिया

पालतू जानवरों की मालकिन ने दूषित डॉग ट्रीट मिलने के बाद एक बड़ी निर्माता कंपनी पर मुकदमा जीता है, जिससे पेट केयर सेक्टर में कॉर्पोरेट जवाबदेही पर एक महत्वपूर्ण फैसला आया है।

पालतू जानवरों के मालिकों के लिए उनके साथियों की सेहत और सुरक्षा सर्वोपरि होती है, लेकिन चंडीगढ़ की एक महिला के लिए सामान्य सी खरीदारी एक परेशान करने वाला अनुभव बन गई। स्थानीय निवासी हिमानी जम्वाल ने Drools Pet Food Private Limited के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी, जब उन्हें पता चला कि उनके लैब्राडोर के लिए खरीदे गए 'Drools Absolute Calcium (sausages)' के पैकेट में जीवित कीड़े और इल्लियां थीं।

अप्रैल 2023 में हुई इस घटना के बाद जम्वाल ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज कराई। पैकेट खोलने पर उन्होंने फोटोग्राफ और वीडियो के जरिए उत्पाद की स्थिति का दस्तावेजीकरण किया, जिससे यह स्पष्ट सबूत मिला कि भोजन दूषित था। कंपनी से सीधे समाधान की कोशिश करने के बावजूद उन्हें केवल निराशा हाथ लगी, जिसके बाद उन्होंने कानूनी रास्ता अपनाया।

कंपनी का बचाव खारिज

सुनवाई के दौरान, कंपनी ने सारा दोष उपभोक्ता पर मढ़ने की कोशिश की। Drools Pet Food Private Limited ने तर्क दिया कि उत्पाद की गुणवत्ता सही भंडारण स्थितियों, यानी 'ठंडी और सूखी जगह' पर निर्भर करती है। उन्होंने दावा किया कि जम्वाल द्वारा इन निर्देशों का पालन न करने के कारण ही उत्पाद में कीड़े पड़े।

हालांकि, आयोग उनके दावों से सहमत नहीं हुआ। 2 जून को दिए अपने आदेश में अदालत ने कहा कि कंपनी यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं दे पाई कि महिला ने उत्पाद को गलत तरीके से रखा था। कंपनी के तर्क को 'पूरी तरह से काल्पनिक' करार देते हुए पीठ ने फैसला सुनाया कि दूषित उत्पाद के लिए जिम्मेदारी से बचने के लिए ऐसे बचाव का सहारा नहीं लिया जा सकता।

फैसला और कानूनी नजीर

अदालत ने अंततः कंपनी को अनुचित व्यापार प्रथाओं और खराब सेवा के लिए दोषी ठहराया। आयोग ने उत्पाद की मूल कीमत 540 रुपये वापस करने के साथ-साथ खरीद की तारीख से 6% वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया। इसके अतिरिक्त, कंपनी को मानसिक पीड़ा के लिए 10,000 रुपये का मुआवजा और कानूनी खर्च का भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।

हालांकि कंपनी ने यह भी तर्क दिया था कि जम्वाल यह साबित करने के लिए कोई पशु चिकित्सा पर्चा पेश नहीं कर सकीं कि भोजन से उनके कुत्ते को कोई बीमारी हुई, लेकिन अदालत का फैसला उपभोक्ता विश्वास के उल्लंघन और घटिया सामान बेचने पर केंद्रित रहा। यह फैसला निर्माताओं के लिए एक कड़ा संदेश है कि आपूर्ति श्रृंखला की अखंडता बनाए रखना केवल ब्रांड की प्राथमिकता नहीं, बल्कि एक कानूनी दायित्व है।

द्वारा पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्क
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