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केंद्र ने कोचीन शिपयार्ड में हिस्सेदारी बिक्री के लिए 1,400 रुपये का फ्लोर प्राइस तय किया

क्या आप कोचीन शिपयार्ड में हिस्सेदारी खरीदना चाहते हैं? केंद्र ने 1,400 रुपये प्रति शेयर के भाव पर ऑफर फॉर सेल लॉन्च किया

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 7 जुलाई 2026· 2 मिनट पढ़ें
कोचीन शिपयार्ड हिस्सेदारी बिक्री के लिए केंद्र ने 1,400 रुपये का फ्लोर प्राइस तय किया
कोचीन शिपयार्ड हिस्सेदारी बिक्री के लिए केंद्र ने 1,400 रुपये का फ्लोर प्राइस तय किया

सरकार ने भारत के समुद्री क्षेत्र को आधुनिक बनाने की अपनी व्यापक योजना के तहत कोचीन शिपयार्ड में 5.04% तक इक्विटी बेचने के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) की शुरुआत की है।

सरकार ने उन निवेशकों के लिए आधिकारिक तौर पर रास्ता खोल दिया है जो कोचीन शिपयार्ड में हिस्सेदारी खरीदना चाहते हैं। कंपनी की 2.52% पेड-अप इक्विटी के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) की घोषणा की गई है। यदि बाजार में मांग मजबूत रहती है, तो 'ग्रीन-शू' विकल्प के जरिए केंद्र सरकार अतिरिक्त 2.52% हिस्सेदारी भी बेच सकती है, जिससे इस डिफेंस पीएसयू (PSU) की कुल 5.04% हिस्सेदारी बिक्री के लिए उपलब्ध होगी। फ्लोर प्राइस 1,400 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है, जिसके बाद बाजार में स्वाभाविक प्रतिक्रिया देखने को मिली और शुरुआती सत्र में शेयर 4% तक लुढ़क गया।

बिक्री की प्रक्रिया को दो दिनों में बांटा गया है ताकि अलग-अलग श्रेणियों के निवेशकों को मौका मिल सके। गैर-खुदरा निवेशकों (Non-retail investors) के लिए बोली 7 जुलाई, 2026 को शुरू हुई, जबकि खुदरा निवेशक 8 जुलाई, 2026 को बोली लगा सकेंगे। निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) ने सोशल मीडिया के जरिए इन विवरणों की पुष्टि की है। यह सरकार के उस इरादे को दर्शाता है जिसके तहत वह अपनी हिस्सेदारी का मुद्रीकरण करना चाहती है, जबकि यह स्टॉक डिफेंस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए एक आकर्षक संपत्ति बना हुआ है।

बड़ी तस्वीर: समुद्री क्षेत्र का कायाकल्प

यह विनिवेश केवल बैलेंस शीट को संतुलित करने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह भारत के समुद्री बुनियादी ढांचे की ओर एक बड़े और दीर्घकालिक बदलाव का हिस्सा है। देश का लगभग 95% व्यापार समुद्री मार्गों से होता है, जिसे देखते हुए सरकार 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' के तहत इस क्षेत्र में भारी पूंजी निवेश कर रही है। यह योजना काफी महत्वाकांक्षी है, जिसका लक्ष्य बंदरगाहों, ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर और अंतर्देशीय जलमार्गों में 80 लाख करोड़ रुपये का निवेश करना है।

इसे गति देने के लिए सरकार ने कई वित्तीय सुरक्षा उपाय किए हैं। जहाज निर्माण क्षमता के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण प्रदान करने हेतु 25,000 करोड़ रुपये का मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड (MDF) तैयार किया गया है। इसके साथ ही, 24,736 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 'शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम' (SBFAS) को फिर से शुरू किया गया है, जिसे विशेष रूप से घरेलू जहाज निर्माताओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले होने वाली लागत संबंधी नुकसान की भरपाई करने के लिए डिजाइन किया गया है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

कोचीन शिपयार्ड में हिस्सेदारी बेचने का कदम सरकारी उद्यमों के प्रबंधन के प्रति एक रणनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। नियंत्रण अपने पास रखते हुए निजी भागीदारी को बढ़ाकर, सरकार राजकोषीय मजबूती और पेशेवर निगरानी की आवश्यकता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा, विशाखापत्तनम में 305 करोड़ रुपये के निवेश से 'इंडियन शिप टेक्नोलॉजी सेंटर' की स्थापना स्वदेशी आरएंडडी (R&D) और डिजाइन की ओर बढ़ते झुकाव को रेखांकित करती है।

बाजार के लिए, शेयर की कीमत में 4% की गिरावट एक निश्चित फ्लोर प्राइस पर OFS की घोषणा के बाद की सामान्य प्रतिक्रिया है। जहां खुदरा निवेशक Upstox जैसे प्लेटफॉर्म पर कीमतों में उतार-चढ़ाव देख रहे हैं, वहीं इस खबर का मुख्य सार सरकार द्वारा शिपयार्ड के प्रदर्शन को बहु-ट्रिलियन रुपये के समुद्री विस्तार से जोड़ने का प्रयास है। निवेशक केवल एक शिपयार्ड में निवेश नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे एक ऐसे सरकारी इकोसिस्टम का हिस्सा बन रहे हैं जो दशकों में अपने सबसे महत्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तन से गुजर रहा है।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।