ब्लूस की राह में मुश्किलें: चोट की चिंता ने फ्रांस के वर्ल्ड कप अभियान पर डाले साये
Équipe de France: नॉर्वे के खिलाफ जीत के बाद दो खिलाड़ी अभ्यास से बाहर
नॉर्वे पर 4-1 की धमाकेदार जीत के बाद, फ्रांसीसी टीम अब रिकवरी पर ध्यान केंद्रित कर रही है, क्योंकि नॉकआउट दौर से पहले दो प्रमुख खिलाड़ी ट्रेनिंग से बाहर रहे।
इस हफ्ते फ्रांसीसी खेमे में मिली-जुली स्थिति देखने को मिल रही है। नॉर्वे के खिलाफ 4-1 की शानदार जीत के साथ ग्रुप स्टेज का सफर खत्म करने के बाद, फ्रांस की टीम फिर से काम पर जुट गई है। हालांकि, टूर्नामेंट के व्यस्त शेड्यूल के कारण ट्रेनिंग सत्र की तीव्रता को थोड़ा कम रखा गया है। जहां सत्रह खिलाड़ी मैदान पर अभ्यास करते दिखे, वहीं दो बड़े नामों की अनुपस्थिति ने कोचिंग स्टाफ के बीच हल्की चिंता पैदा कर दी है।
फिटनेस पर नजर
मार्कस थुरम और एन'गोलो कांटे मुख्य ग्रुप से नदारद थे। थुरम पिंडली की चोट से जूझ रहे हैं और उन्हें इनडोर उपचार के लिए रखा गया है। कांटे, जो नॉर्वे के खिलाफ मैच में नहीं खेले थे, उन्हें भी एहतियात के तौर पर अंदर ही रखा गया। एक ऐसी टीम के लिए जो अपनी बेंच स्ट्रेंथ पर गर्व करती है, राउंड ऑफ 16 से पहले इन खिलाड़ियों की फिटनेस संभालना सपोर्ट स्टाफ के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
ट्रेनिंग सत्र काफी तेज गति वाला था। पूरी टीम के न होने के बावजूद, कोचिंग स्टाफ ने छह-बनाम-छह का अभ्यास सत्र आयोजित किया। एक तरफ लुकास हर्नांडेज़ और वारेन ज़ायर-एमरी जैसे खिलाड़ी थे, तो दूसरी तरफ एड्रियन रैबियोट और इब्राहिमा कोनाटे शामिल थे। नॉर्वे के खिलाफ खेलने वाले बाकी खिलाड़ियों ने रिकवरी प्रोटोकॉल पर ध्यान दिया, ताकि वे मंगलवार रात 11:00 बजे स्वीडन के खिलाफ होने वाले अहम मुकाबले के लिए तैयार हो सकें।
यह क्यों मायने रखता है: गहराई की परीक्षा
डिडिएर डेसचैम्प्स के लिए बड़ी तस्वीर साफ है: टूर्नामेंट फुटबॉल में लय बहुत नाजुक होती है। हालांकि टीम ने साबित किया है कि वे नॉर्वे जैसी टीमों को ध्वस्त कर सकते हैं, लेकिन नॉकआउट चरणों में असली चुनौती फिटनेस की चिंताओं के बावजूद अपनी लय बनाए रखना है। कांटे और थुरम जैसे खिलाड़ियों का प्रबंधन केवल अगले मैच के बारे में नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के बारे में है कि टीम का मुख्य ढांचा टूर्नामेंट के अंत तक बरकरार रहे। यदि दो प्रमुख खिलाड़ियों को लंबे सफर के लिए आराम दिया जा रहा है, तो यह आक्रामक इरादे से हटकर रणनीतिक सावधानी की ओर बदलाव का संकेत है।
स्वीडन के खिलाफ आगामी मैच असली अग्निपरीक्षा होगी। ग्रुप स्टेज खत्म होने के बाद दबाव बढ़ गया है, और पूरी टीम की उपलब्धता क्वार्टर फाइनल तक के सफर के लिए निर्णायक साबित होगी। टीम के पास प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन अगले 48 घंटे यह तय करेंगे कि क्या उनके पास अपने अभियान को पटरी पर रखने के लिए जरूरी मजबूती है या नहीं।
प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।