लाइमलाइट से दूर: कैसे परिजाद जोराबियन ने बॉलीवुड छोड़कर खड़ा किया 120 करोड़ का बिजनेस साम्राज्य
बॉलीवुड की चमक-धमक को पीछे छोड़ परिजाद जोराबियन अब संभाल रही हैं अपना करोड़ों का पोल्ट्री बिजनेस; जानिए 33 साल की उम्र में लिए गए उनके इस बड़े फैसले और अमिताभ बच्चन के साथ उनके कनेक्शन के बारे में।
अमिताभ बच्चन के साथ स्क्रीन साझा करने से लेकर एक विशाल पोल्ट्री उद्यम का नेतृत्व करने तक, अभिनेत्री का यह बदलाव करियर में व्यावहारिक बदलाव का एक बेहतरीन उदाहरण है।
2000 के दशक की शुरुआत भारतीय सिनेमा के लिए एक दिलचस्प और प्रयोगात्मक दौर था। जहाँ मुख्यधारा का बॉलीवुड मास-मार्केट ब्लॉकबस्टर फिल्मों के पीछे भाग रहा था, वहीं भारतीय अंग्रेजी फिल्मों का एक शांत आंदोलन—जैसे कि मॉनसून वेडिंग और हैदराबाद ब्लूज़—अपनी जगह बना रहा था। इसी बदलाव के बीच उभरीं परिजाद जोराबियन, एक ऐसी अभिनेत्री जो न्यूयॉर्क से एमबीए की डिग्री लेकर स्क्रीन पर उतरीं और जिनमें पारंपरिक स्टारडम के प्रति कोई खास मोह नहीं था।
एक इत्तेफाक से बनीं अभिनेत्री
परिजाद का इंडस्ट्री में आना कभी भी किसी ठोस योजना का हिस्सा नहीं था। मुंबई के एक ईरानी परिवार में पली-बढ़ीं परिजाद के प्रोफेशनल डीएनए में उद्यमिता (entrepreneurship) बसी थी, न कि चकाचौंध। भारत में अपनी शिक्षा पूरी करने और विदेश से एमबीए करने के बाद, उन्होंने ली स्ट्रासबर्ग थिएटर एंड फिल्म इंस्टीट्यूट में एक्टिंग क्लास ली, जिसका मुख्य उद्देश्य अपने दायरे को बढ़ाना था। हालांकि, एक पारिवारिक समारोह के दौरान उनकी मुलाकात एक मॉडल कोऑर्डिनेटर से हुई और उनकी जिंदगी ने मोड़ ले लिया। उस इत्तेफाक ने उन्हें पहला काम दिलाया: मशहूर 'फेयर एंड लवली' विज्ञापन।
नागेश कुकुनूर की फिल्म बॉलीवुड कॉलिंग में भूमिका मिलने के बाद भी, यह बदलाव तुरंत नहीं आया। वह अपने पिता के ऑफिस की जिम्मेदारियों और फिल्म सेट की अनिश्चितताओं के बीच तालमेल बिठाती रहीं। अक्सर शूटिंग के लिए छुट्टी लेना और प्रोजेक्ट्स में देरी होने पर वापस कॉर्पोरेट डेस्क पर लौट आना उनका रूटीन था।
सपनों की इंडस्ट्री में हकीकत की समझ
अमिताभ बच्चन, ओम पुरी और शबाना आजमी जैसे दिग्गजों के साथ काम करते हुए, परिजाद ने इंडस्ट्री की नब्ज को जल्दी ही समझ लिया था। वह अपनी स्थिति को लेकर स्पष्ट थीं और जानती थीं कि उन्हें करिश्मा कपूर जैसी मास-फैन फॉलोइंग नहीं मिलेगी। यह व्यावहारिकता—जो दिखावे से भरी इंडस्ट्री में एक दुर्लभ गुण है—का मतलब था कि जब उन्होंने बॉलीवुड छोड़ने का फैसला किया, तो यह कोई मिड-लाइफ क्राइसिस नहीं, बल्कि अपनी जड़ों की ओर एक सोची-समझी वापसी थी। उनका इरादा हमेशा से कुछ बनाने का था, न कि सिर्फ अभिनय करने का।
आज, अभिनेत्री अपने परिवार के 'जोराबियंस चिकन्स' (Zorabians Chickens) को संभालती हैं, जो एक पोल्ट्री बिजनेस है और जिसका सालाना टर्नओवर 120 करोड़ रुपये है। फिल्म सेट से सप्लाई चेन तक का उनका सफर सहज रहा क्योंकि उनके लिए बिजनेस हमेशा से प्राथमिकता था। उनकी कहानी इस बात का एक अनोखा उदाहरण है कि कैसे प्रोफेशनल पहचान समय के साथ बदल सकती है।
यह क्यों मायने रखता है: रीइंवेंशन का बिजनेस
परिजाद जोराबियन की कहानी सिर्फ एक दिलचस्प किस्सा नहीं है; यह उन प्रोफेशनल्स के बढ़ते चलन को दर्शाती है जो प्रसिद्धि की अस्थिरता को छोड़कर परिवार द्वारा संचालित ठोस उद्यमों की स्थिरता की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे दौर में जब 'पर्सनल ब्रांडिंग' को अक्सर करियर की सफलता मान लिया जाता है, उनकी यात्रा यह दिखाती है कि सबसे टिकाऊ रास्ते वही होते हैं जहाँ व्यक्ति अपने जुनून और अपनी क्षमताओं की व्यावहारिक समझ के बीच संतुलन बनाता है।
यह स्रोत सामग्री उस दौर की झलक प्रदान करती है जब स्वतंत्र सिनेमा अपनी पहचान बना रहा था। अपनी रचनात्मक पहचान के चरम पर इंडस्ट्री से बाहर निकलकर, उन्होंने प्रासंगिकता खोने के आम जाल से खुद को बचाया और साबित किया कि सबसे सफल 'सेकंड एक्ट' अक्सर वही होता है जिसके लिए आप हमेशा से तैयार रहते हैं।
प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।