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पिच से परे: जब क्रिकेट में खेल भावना पीछे छूट गई

दोनों टेस्ट के बाद रिज़वान ने हाथ नहीं मिलाया: लिटन दास | पाकिस्तान के खिलाफ बांग्लादेश की लगातार चौथी टेस्ट जीत | इनशॉर्ट्स

द्वारा अनन्या अय्यरप्रकाशित 11 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
पिच से परे: जब क्रिकेट में खेल भावना पीछे छूट गई
पिच से परे: जब क्रिकेट में खेल भावना पीछे छूट गई

पाकिस्तान के खिलाफ बांग्लादेश की ऐतिहासिक सीरीज जीत पर एक ऐसे गैर-खिलाड़ी व्यवहार की छाया पड़ गई है, जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है।

बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच हाल ही में संपन्न हुई टेस्ट सीरीज, जिसमें 'टाइगर्स' ने 2-0 से शानदार जीत दर्ज की, का अंत एक कड़वे अनुभव के साथ हुआ है। बांग्लादेश के विकेटकीपर-बल्लेबाज लिटन दास ने सार्वजनिक रूप से अपने समकक्ष मोहम्मद रिज़वान पर आरोप लगाया है कि उन्होंने दोनों टेस्ट मैचों के बाद पारंपरिक रूप से हाथ मिलाने की औपचारिकता को नजरअंदाज किया।

खिलाड़ियों के लिए मैच के बाद हाथ मिलाना केवल एक रस्म नहीं, बल्कि खेल भावना का सम्मान है। इस घटना पर खुलकर बात करते हुए लिटन दास ने कहा कि हार-जीत से परे पेशेवर शिष्टाचार का पालन किया जाना चाहिए था। दास ने निराशा जताते हुए कहा, "वह चाहे कितने भी बड़े खिलाड़ी क्यों न हों, ऐसा नहीं होना चाहिए था।" उन्होंने अपनी टीम की ऐतिहासिक जीत के बाद मिले इस व्यवहार पर नाराजगी जाहिर की।

बढ़ता हुआ तनाव

यह मामला केवल हाथ न मिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों टीमों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को भी दर्शाता है। पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैचों में बांग्लादेश की लगातार चौथी जीत यह बताती है कि क्षेत्रीय क्रिकेट की स्थिति बदल रही है। जब इतनी कड़ी प्रतिद्वंद्विता के बीच पेशेवर शिष्टाचार की कमी दिखती है, तो प्रशंसक और विश्लेषक सवाल उठाने लगते हैं। हालांकि रिज़वान ने अभी तक इस पर अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन इन आरोपों ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों के व्यवहार को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

बड़ी तस्वीर: यह क्यों मायने रखता है

अंतरराष्ट्रीय खेलों की दुनिया में छवि बहुत महत्वपूर्ण होती है। जब रिज़वान जैसा सीनियर खिलाड़ी मैच के बाद की रस्म को छोड़ता है, तो यह न केवल उस खिलाड़ी की छवि खराब करता है, बल्कि क्रिकेट बोर्डों के बीच के संबंधों पर भी असर डालता है। यह घटना याद दिलाती है कि जैसे-जैसे 'छोटी' और 'बड़ी' टीमों के बीच का अंतर कम हो रहा है, मैदान के बाहर का मानसिक संघर्ष भी मैदान के अंदर के मुकाबले जैसा ही तनावपूर्ण होता जा रहा है। प्रशंसकों को डर है कि ऐसा व्यवहार भविष्य के मुकाबलों के लिए एक गलत उदाहरण पेश कर सकता है और प्रतिस्पर्धा को दुश्मनी में बदल सकता है।

क्रिकेट को अक्सर 'जेंटलमैन गेम' कहा जाता है, लेकिन हाल के हफ्तों में यह खेल भावना कमजोर होती दिख रही है। यह फैसला लेने में हुई चूक थी या किसी गहरे तनाव का नतीजा, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन पाकिस्तानी खेमे की चुप्पी बांग्लादेशी टीम की निराशा को और बढ़ा रही है। फिलहाल रिकॉर्ड बुक में तो बांग्लादेश की 2-0 से जीत दर्ज है, लेकिन चर्चा उस व्यवहार पर टिकी है जो आखिरी गेंद के बाद देखने को नहीं मिला।

द्वारा अनन्या अय्यर
वैश्विक मामले संवाददाता

अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।