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डूरंड लाइन के पार: पाकिस्तान के अंदर घुसे तालिबान के ड्रोन, किए हमले

अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर कर दिया हमला, अंदर तक घुस गए तालिबान के ड्रोन; आतंकी कैंप तबाह

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 26 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
डूरंड लाइन के पार: पाकिस्तान के अंदर घुसे तालिबान के ड्रोन
डूरंड लाइन के पार: पाकिस्तान के अंदर घुसे तालिबान के ड्रोन

सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच, तालिबान बलों ने पाकिस्तान के अंदरूनी इलाकों में ड्रोन हमले किए हैं। तालिबान का दावा है कि उन्होंने हालिया हवाई हमलों के जवाब में इन आतंकी ठिकानों को नष्ट किया है।

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच की अस्थिर सीमा एक नए विवाद का केंद्र बन गई है। एक महत्वपूर्ण सैन्य घटनाक्रम में, अफगान तालिबान शासन ने पुष्टि की है कि उसकी वायु इकाइयों ने पाकिस्तानी क्षेत्र के अंदर, विशेष रूप से बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा (KPK) के क्षेत्रों में सटीक ड्रोन हमले किए हैं। यह कदम अफगानिस्तान के नंगरहार और पक्तिया प्रांतों में पाकिस्तान द्वारा किए गए घातक हवाई हमलों के बाद उठाया गया है, जिसमें काबुल का आरोप है कि आम नागरिकों, महिलाओं और बच्चों की मौत हुई है।

अफगान रक्षा मंत्रालय के एक औपचारिक बयान के अनुसार, ये अभियान केवल जवाबी कार्रवाई नहीं बल्कि रणनीतिक थे। तालिबान का दावा है कि उन्होंने गुलिस्तान, शकर आब और कंबर खेल के रूप में पहचाने गए क्षेत्रों में ISIS-K (इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत) के शिविरों को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया है। काबुल का कहना है कि ये विशिष्ट स्थान ऐसे अड्डे थे जहां आतंकी समूह रंगरूटों को प्रशिक्षित करता था और अफगान राज्य के खिलाफ हमलों की साजिश रचता था, जिसे कथित तौर पर "दुश्मन खुफिया" तत्वों का समर्थन प्राप्त था।

सीमा पार बढ़ते आरोप-प्रत्यारोप

यह टकराव उस गहरे अविश्वास को उजागर करता है जो वर्तमान में दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को परिभाषित कर रहा है। पाकिस्तान लंबे समय से तालिबान के नेतृत्व वाले प्रशासन पर TTP (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) और ISIS-K जैसे समूहों को शरण देने का आरोप लगाता रहा है, और अपनी सीमाओं के भीतर बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराता है। इसके विपरीत, तालिबान सरकार ने लगातार इन आरोपों को खारिज किया है और इसके बजाय इस्लामाबाद पर उनके शासन को अस्थिर करने के लिए ISIS तत्वों को पनाह देने का आरोप लगाया है।

फिलहाल, इस्लामाबाद ने इन विशिष्ट हमलों के बारे में आधिकारिक तौर पर चुप्पी साधे रखी है। ऐतिहासिक रूप से, पाकिस्तान ने या तो ऐसी घुसपैठ से इनकार किया है या विदेशी बलों द्वारा सीमा पार की गई कार्रवाई के दावों को खारिज कर दिया है। हालांकि, इस नवीनतम घटना का पैमाना—जिसमें पाकिस्तानी धरती के भीतर ड्रोन की तैनाती शामिल है—यह संकेत देता है कि तालिबान अपनी सैन्य पहुंच दिखाने के तरीके में बदलाव ला रहा है।

यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर

यह केवल एक स्थानीय झड़प से कहीं अधिक है; यह क्षेत्रीय सुरक्षा गतिशीलता का टूटना है। इस घर्षण के बीच 94,000 से अधिक लोगों का विस्थापन उस मानवीय लागत को रेखांकित करता है, जहां सीमा आतंकवादियों के लिए आसान और राज्य बलों के लिए अधिक सैन्यीकृत होती जा रही है। जब क्षेत्रीय खिलाड़ी हिसाब बराबर करने के लिए ड्रोन युद्ध का उपयोग करने लगते हैं, तो गलत गणना का जोखिम तेजी से बढ़ जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए, यह एक गंभीर चेतावनी है कि काबुल के पतन से क्षेत्र में आतंकवाद खत्म नहीं हुआ; इसने केवल बिसात को बदल दिया है। अमित कुमार द्वारा मूल लेख में दी गई रिपोर्ट के अनुसार, कई देश अब मध्यस्थता के प्रयास शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्य चुनौती यह बनी हुई है: जब तक दोनों देश एक-दूसरे को अपनी आंतरिक सुरक्षा के खतरों का मुख्य कारण मानते रहेंगे, तब तक हवाई हमलों और जवाबी कार्रवाई का यह चक्र जारी रहने की संभावना है, जिससे पूरी सीमा स्थायी अस्थिरता की स्थिति में बनी रहेगी।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।