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7.5 लाख से आगे: स्टूडेंट लोन के लिए क्रेडिट गारंटी बढ़ाने पर विचार कर रही सरकार

अंतर-मंत्रालयी परामर्श में कोलैटरल-फ्री एजुकेशन लोन के लिए क्रेडिट कवर बढ़ाने पर हो सकती है चर्चा

द्वारा राष्ट्रीय मामले डेस्कप्रकाशित 8 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
7.5 लाख से अधिक: स्टूडेंट लोन के लिए क्रेडिट गारंटी बढ़ाने पर विचार कर रही सरकार
7.5 लाख से अधिक: स्टूडेंट लोन के लिए क्रेडिट गारंटी बढ़ाने पर विचार कर रही सरकार

एजुकेशन लोन के लिए कोलैटरल-फ्री सीमा बढ़ाने को लेकर अंतर-मंत्रालयी बातचीत चल रही है, जिससे उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों पर वित्तीय बोझ कम हो सकता है।

शीर्ष संस्थानों में दाखिला लेने के इच्छुक हजारों छात्रों के लिए सबसे बड़ी बाधा अक्सर प्रवेश परीक्षा नहीं, बल्कि बैंक मैनेजर की मेज होती है। हालांकि सरकार लंबे समय से छोटी राशि के लिए सुरक्षा कवच प्रदान करती रही है, लेकिन प्रोफेशनल डिग्री की बढ़ती लागत ने मौजूदा 7.5 लाख रुपये की सीमा को अपर्याप्त बना दिया है। अब, वित्त और शिक्षा मंत्रालय कोलैटरल-फ्री एजुकेशन लोन के लिए क्रेडिट गारंटी कवर बढ़ाने पर प्रारंभिक चर्चा कर रहे हैं। यह कदम बैंकों द्वारा इस क्षेत्र में जोखिम का आकलन करने के तरीके को मौलिक रूप से बदल सकता है।

सुरक्षा कवच का विस्तार

वर्तमान प्रणाली के केंद्र में 'क्रेडिट गारंटी फंड स्कीम फॉर एजुकेशन लोन्स' (CGFSEL) है। नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी द्वारा प्रबंधित यह योजना वर्तमान में ऋण राशि का 75% कवर करती है, बशर्ते मूलधन 7.5 लाख रुपये से अधिक न हो। इस सीमा को बढ़ाकर, सरकार का लक्ष्य बैंकों को बिना किसी भौतिक सुरक्षा (कोलैटरल) की मांग किए बड़ी क्रेडिट लाइन देने के लिए प्रोत्साहित करना है—जो अक्सर मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए एक बड़ी बाधा बन जाती है।

इस तरह के समर्थन की मांग स्पष्ट है। आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2025 तक 11.8 लाख से अधिक लोन खाते CGFSEL के दायरे में आ चुके थे, और पिछले वित्त वर्ष में ही गारंटीकृत ऋण राशि में 9.35% की वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2026 में 3.8 लाख से अधिक आवेदनों को मंजूरी मिलने के साथ, सुलभ वित्तपोषण की मांग बढ़ रही है, जिससे नीति निर्माताओं को मौजूदा सीमाओं पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

पहुंच के नियमों पर पुनर्विचार

मौद्रिक सीमा से परे, सरकार प्रक्रिया को अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने के लिए संरचनात्मक सुधारों पर भी विचार कर रही है। अधिकारी वर्तमान में अनिवार्य सह-आवेदक (co-applicant) की शर्त को हटाने पर बहस कर रहे हैं, जो अक्सर आवेदन प्रक्रिया को जटिल बनाती है। इसके अलावा, गारंटीकृत ऋणों के लिए पात्रता मानदंड को व्यापक बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि उन सभी छात्रों को शामिल किया जा सके जो नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (NAAC) जैसे निकायों द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थानों में मेरिट के आधार पर प्रवेश पाते हैं।

ये विचार-विमर्श 2024 में शुरू की गई 'पीएम-विद्यालक्ष्मी' योजना की गति पर आधारित हैं। यह योजना पहले से ही 952 चिन्हित गुणवत्तापूर्ण संस्थानों के छात्रों के लिए 7.5 लाख रुपये तक के कोलैटरल-फ्री और गारंटर-फ्री लोन प्रदान करती है, जिसमें ब्याज दरें बैंक की बाहरी बेंचमार्क ऋण दर और 50-बेसिस पॉइंट मार्जिन तक सीमित हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

क्रेडिट गारंटी बढ़ाने का प्रयास अकादमिक आकांक्षा और वित्तीय वास्तविकता के बीच की खाई को पाटने के लिए एक सोची-समझी रणनीति है। जब बैंकों को सरकार समर्थित गारंटी के माध्यम से जोखिम के एक हिस्से से सुरक्षा मिलती है, तो वे स्वाभाविक रूप से उन छात्रों को ऋण देने के लिए अधिक इच्छुक होते हैं जिनके पास पारंपरिक कोलैटरल नहीं है।

यदि यह सफल होता है, तो इस नीतिगत बदलाव से निजी ऋणदाताओं पर निर्भरता कम होने और महंगी प्रोफेशनल शिक्षा तक पहुंच का लोकतंत्रीकरण होने की संभावना है। हालांकि, योजना का अंतिम स्वरूप आगामी अंतर-मंत्रालयी परामर्श पर निर्भर करेगा। सरकार के लिए, चुनौती बैड लोन के जोखिम को कम करने और यह सुनिश्चित करने के बीच संतुलन बनाने की है कि उच्च शिक्षा की लागत अगली पीढ़ी के लिए एक दुर्गम बाधा न बने।

द्वारा राष्ट्रीय मामले डेस्क
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