अयोध्या के बंद दरवाजों के पीछे: राम मंदिर दान घोटाले की जांच
राम मंदिर दान गबन मामले में तीन और आरोपियों की कस्टडी मांगेगी अयोध्या पुलिस

जैसे-जैसे जांचकर्ता काउंटिंग रूम के भीतर चोरी के व्यवस्थित पैटर्न का खुलासा कर रहे हैं, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट जवाबदेही के संकट का सामना कर रहा है।
अयोध्या में राम मंदिर की पवित्रता सार्वजनिक दान के कथित गबन की व्यापक जांच से हिल गई है। अयोध्या पुलिस अब तीन और व्यक्तियों—करुणेश पांडे, अनुकल्प मिश्रा और लव कुश मिश्रा—की कस्टडी रिमांड लेने की तैयारी कर रही है ताकि नकदी चढ़ावे के गायब होने के मामले में चुप्पी की दीवार को तोड़ा जा सके। यह कदम तब उठाया गया है जब मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने उत्तर प्रदेश सरकार को एक गंभीर प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें दान की गिनती के दौरान प्रणालीगत विफलताओं और खुलेआम चोरी को उजागर किया गया है।
कैमरे में कैद सबूत
SIT की जांच, जिसने 27 अप्रैल से 5 जून तक के CCTV फुटेज की समीक्षा की, दुर्व्यवहार की एक शर्मनाक तस्वीर पेश करती है। रिपोर्ट में कर्मचारियों द्वारा अपने कपड़ों, जूतों और जेबों में नोट छिपाने के करीब 70 अलग-अलग उदाहरण दर्ज हैं। ट्रस्ट के लिए सबसे चिंताजनक बात यह है कि ये कृत्य अक्सर मिलीभगत से किए गए, जिसमें कुछ कर्मचारी अपने साथियों को कैमरे की नजर से बचाने की कोशिश करते दिखे। बैंक रिकॉर्ड, SOP और गवाहों के बयानों की जांच से संकेत मिलता है कि यह चोरी अप्रैल से पहले भी हो रही थी, हालांकि पुराने फुटेज न होने के कारण चोरी के पूर्ण पैमाने का आकलन करना मुश्किल है।
विश्वास का टूटना
इसका असर बहुत तेजी से हुआ है। संस्थागत स्तर पर, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा नेतृत्व परिवर्तन हुआ है। कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने पुष्टि की है कि हाल ही में हुई बैठक के बाद महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए हैं। इस बीच, कानूनी घेरा भी कसता जा रहा है। पहले से ही 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए आठ लोगों के अलावा, अधिकारियों ने अन्य संदिग्धों के घरों पर छापेमारी की है, और अयोध्या बार एसोसिएशन ने कड़ी चेतावनी जारी की है कि जो भी वकील इस मामले में आरोपियों का बचाव करेगा, उस पर 5 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है
इस घोटाले का पैमाना केवल वित्तीय नहीं है; यह एक गंभीर प्रबंधन विफलता है। जब राष्ट्रीय महत्व और भावनात्मक जुड़ाव वाली कोई परियोजना इतने कमजोर आंतरिक नियंत्रण के साथ चलती है, तो यह उसकी शासन व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। प्रभावी तलाशी और बायोमेट्रिक निगरानी जैसे बुनियादी सुरक्षा उपायों को लागू करने में विफलता प्रबंधन स्तर पर खतरनाक लापरवाही को दर्शाती है। उन लाखों भक्तों के लिए जिन्होंने आस्था के साथ दान दिया, यह मामला एक कठोर अनुस्मारक है कि पारदर्शिता उतनी ही सख्त होनी चाहिए जितनी मंदिर के प्रति भक्ति। आगे चलकर, SIT के निष्कर्ष संभवतः ट्रस्ट को नकदी प्रबंधन के तरीके को पूरी तरह से बदलने के लिए मजबूर करेंगे, जो भविष्य में धार्मिक संस्थानों द्वारा सार्वजनिक धन के प्रबंधन के लिए एक मिसाल बनेगा।
रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।