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अयोध्या के वकील एकजुट: राम मंदिर चंदा घोटाले के आरोपियों का कोई नहीं करेगा बचाव

'भावनाएं आहत': अयोध्या के वकीलों ने राम मंदिर चंदा मामले के आरोपियों का केस लड़ने से किया इनकार

द्वारा रोहन गुप्ताप्रकाशित 28 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
अयोध्या के वकील एकजुट: राम मंदिर चंदा घोटाले के आरोपियों का कोई नहीं करेगा बचाव
अयोध्या के वकील एकजुट: राम मंदिर चंदा घोटाले के आरोपियों का कोई नहीं करेगा बचाव

फैजाबाद के वकीलों ने सामूहिक रूप से फैसला किया है कि वे राम मंदिर दान पेटी से कथित तौर पर धन की हेराफेरी के आरोप में गिरफ्तार आठ व्यक्तियों का बचाव नहीं करेंगे।

अयोध्या में इस सप्ताह कानूनी परिदृश्य में बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब स्थानीय बार एसोसिएशन ने राम मंदिर दान के कथित दुरुपयोग के मामले में गिरफ्तार आठ लोगों से दूरी बनाने का फैसला किया। आरोपी—अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, राम शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर (उर्फ टिन्नू यादव)—अब स्थानीय अदालतों में बिना किसी कानूनी प्रतिनिधित्व के हैं। ये लोग, जिन्हें भक्तों द्वारा दान किए गए नकदी और कीमती सामानों को गिनने की संवेदनशील जिम्मेदारी सौंपी गई थी, फिलहाल 29 जून तक न्यायिक हिरासत में हैं।

फैजाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका मिश्रा ने पुष्टि की कि स्थानीय वकीलों में गहरी नाराजगी है, जिसके चलते अनौपचारिक रूप से यह आम सहमति बनी है कि वे इस मामले में पैरवी नहीं करेंगे। हालांकि इस सोमवार को होने वाली आम सभा की बैठक में एक औपचारिक प्रस्ताव आने की उम्मीद है, लेकिन जमीनी स्तर पर वकीलों का रुख स्पष्ट है। सचिव शैलेंद्र जायसवाल ने कहा कि कानूनी समुदाय खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है, क्योंकि यह अपराध मंदिर के चढ़ावे की पवित्रता को निशाना बनाने वाला है।

अदालत से परे

वरिष्ठ अधिवक्ताओं की प्रतिक्रिया काफी तीखी रही है। अनुभवी वकील राजेंद्र चौधरी ने सार्वजनिक रूप से आरोपियों के खिलाफ 'बुलडोजर नीति' अपनाने की वकालत की और तर्क दिया कि उनके कृत्यों ने वैश्विक स्तर पर अयोध्या की प्रतिष्ठा को धूमिल किया है। एक अन्य वकील, विवेक कुमार सिंह ने सुझाव दिया कि अधिकारियों को अदालत में पेशी के दौरान आरोपियों को उच्च सुरक्षा कवर नहीं देना चाहिए था, उनका इशारा था कि विश्वासघात करने वालों के लिए सार्वजनिक आक्रोश ही उचित सजा होती।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) की जांच में अब तक 79.85 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं। भारतीय न्याय संहिता के तहत दर्ज FIR में आपराधिक विश्वासघात, सेवक द्वारा चोरी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। गिरफ्तार व्यक्तियों के घरों पर पुलिस की छापेमारी जांच की तेज गति को दर्शाती है।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है

यह घटना स्थानीय पेशेवर नैतिकता और राम मंदिर से जुड़ी तीव्र जनभावनाओं के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करती है। हालांकि कानूनी प्रतिनिधित्व का अधिकार न्याय प्रणाली की आधारशिला है, लेकिन अयोध्या में सामाजिक आक्रोश आरोपियों के लिए एक बड़ी बाधा बन गया है। मंदिर प्रशासन और राज्य सरकार के लिए, यह घोटाला संस्थागत अखंडता की एक बड़ी परीक्षा है। राजनीतिक तूफान के बीच प्रमुख ट्रस्टियों के इस्तीफे बताते हैं कि इसका असर अदालत से कहीं आगे तक जाएगा। यह मामला याद दिलाता है कि जब सार्वजनिक विश्वास किसी अत्यधिक भावनात्मक और धार्मिक महत्व के स्थान से जुड़ा हो, तो कानूनी प्रक्रिया भी जन आक्रोश का केंद्र बन जाती है।

द्वारा रोहन गुप्ता
बिज़नेस संवाददाता

रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।