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UFC Baku: असु अल्माबायेव ने चार्ल्स जॉनसन को 'सुलोएव स्ट्रेच' सबमिशन से हराकर रचा इतिहास

असु अल्माबायेव ने चार्ल्स जॉनसन को 'सुलोएव स्ट्रेच' से दी मात | UFC Baku

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 27 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
UFC Baku में चार्ल्स जॉनसन के खिलाफ सुलोएव स्ट्रेच सबमिशन लगाते असु अल्माबायेव
UFC Baku में चार्ल्स जॉनसन के खिलाफ सुलोएव स्ट्रेच सबमिशन लगाते असु अल्माबायेव

UFC Baku में तकनीकी कौशल का दुर्लभ प्रदर्शन करते हुए, कजाकिस्तान के असु अल्माबायेव ने चार्ल्स जॉनसन पर 'सुलोएव स्ट्रेच' के जरिए शानदार जीत दर्ज कर फ्लाईवेट डिवीजन में अपनी धाक जमा दी है।

27 जून को बाकू क्रिस्टल हॉल का माहौल बेहद रोमांचक था, लेकिन असु अल्माबायेव की तकनीकी सटीकता ने पूरे एरिना को स्तब्ध कर दिया। नंबर 9 रैंकिंग के दावेदार के रूप में उतरे अल्माबायेव ने रेसलिंग और दबाव बनाने की रणनीति से चार्ल्स जॉनसन को पूरी तरह पस्त कर दिया। जॉनसन, जो अपनी मजबूती और अलग शैली के लिए जाने जाते हैं, ने अपनी लंबाई का फायदा उठाने की कोशिश की, लेकिन कजाख फाइटर के निरंतर कंट्रोल के सामने उनकी एक न चली।

मुकाबला तीसरे राउंड में अपने चरम पर पहुंच गया। जॉनसन द्वारा ट्रायंगल चोक के खतरे के बावजूद, अल्माबायेव ने बड़ी शांति से खुद को बचाया। उन्होंने जॉनसन की पीठ पर नियंत्रण बनाया, उनके पैर को अलग किया और 'सुलोएव स्ट्रेच' लॉक कर दिया—यह एक दुर्लभ और बेहद खतरनाक सबमिशन है जो हैमस्ट्रिंग और घुटने पर अत्यधिक दबाव डालता है। जॉनसन के पास 3:33 मिनट पर टैप आउट करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। अल्माबायेव का यह फिनिश आने वाले कई सालों तक हाइलाइट रील्स में देखा जाएगा।

UFC इतिहास में एक दुर्लभ उपलब्धि

यह प्रदर्शन अल्माबायेव को एक बेहद खास क्लब में शामिल करता है। दिवंगत अर्मेनियाई फाइटर अमर सुलोएव के नाम पर रखा गया 'सुलोएव स्ट्रेच', UFC में सबसे कम इस्तेमाल की जाने वाली तकनीकों में से एक है। इस फाइट से पहले, केवल तीन अन्य फाइटर्स—केनी रॉबर्टसन, अल्जामैन स्टर्लिंग और दिग्गज ज़ाबित मैगोमेडशरीपोव—ही UFC इतिहास में इस मूव को सफलतापूर्वक अंजाम दे पाए थे। आठ साल के सूखे को खत्म करके, अल्माबायेव ने साबित कर दिया है कि वे केवल एक फाइटर नहीं, बल्कि खेल की बारीकियों के गहरे जानकार भी हैं।

जॉनसन के लिए यह रात एक कठिन अंत लेकर आई। शुरुआत में स्ट्राइकिंग और टेकडाउन डिफेंस में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद, अमेरिकी फाइटर अपनी लय बरकरार नहीं रख सके। अल्माबायेव की रक्षात्मक स्थिति से फाइट खत्म करने वाले सबमिशन में बदलने की क्षमता यह दर्शाती है कि आधुनिक फ्लाईवेट डिवीजन में एलीट ग्रैपलर्स और केवल स्ट्राइकिंग पर निर्भर रहने वाले फाइटर्स के बीच कितना बड़ा अंतर है।

यह जीत क्यों मायने रखती है: एक नए दावेदार का उदय

UFC Baku की यह जीत 32 वर्षीय अल्माबायेव के करियर का एक बड़ा टर्निंग पॉइंट है। प्रमोशन में 7-1 के रिकॉर्ड के साथ, वे अब 'प्रॉमिसिंग फाइटर' के लेबल से आगे बढ़कर डिवीजन के लिए एक बड़ा खतरा बन गए हैं। एक ऐसे वेट क्लास में जहां अक्सर गति और कार्डियो का बोलबाला रहता है, अल्माबायेव की उच्च-स्तरीय सबमिशन क्षमता उन्हें टॉप-5 फाइटर्स के लिए एक दुःस्वप्न बनाती है।

बड़ी तस्वीर यह है कि फ्लाईवेट डिवीजन का परिदृश्य बदल रहा है। जैसे-जैसे अल्माबायेव रैंकिंग में ऊपर चढ़ रहे हैं, साम्बो-प्रेरित ग्रैपलिंग और दबाव में संयम बनाए रखने की उनकी अनूठी शैली मौजूदा टाइटल रेस के लिए एक नई चुनौती पेश कर रही है। इस साल की शुरुआत में मेक्सिको हेडलाइनर से हटने के बाद, अजरबैजान में यह दबदबे वाला प्रदर्शन उनके इरादों को साफ जाहिर करता है: यह कजाख स्टार अब डिवीजन के दिग्गजों से भिड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।