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मुख्यमंत्री की चुप्पी पर TVK-DMK में भिड़ंत, तमिलनाडु विधानसभा में भारी हंगामा

डीएमके विधायक ने मुख्यमंत्री को बताया 'मौन', जवाब में टीवीके नेता ने कोलाथुर का जिक्र कर घेरा; सदन में मची अफरा-तफरी

द्वारा रोहन गुप्ताप्रकाशित 19 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
मुख्यमंत्री की चुप्पी पर TVK-DMK में भिड़ंत के बाद विधानसभा में हंगामा
मुख्यमंत्री की चुप्पी पर TVK-DMK में भिड़ंत के बाद विधानसभा में हंगामा

तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री की कार्यशैली को लेकर हुई तीखी बहस ने डीएमके और टीवीके विधायकों के बीच लगभग हाथापाई की स्थिति पैदा कर दी।

राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान तमिलनाडु विधानसभा का माहौल आज बेहद तनावपूर्ण हो गया। विवाद तब शुरू हुआ जब नागरकोइल से डीएमके विधायक ऑस्टिन ने मुख्यमंत्री विजय पर सीधा निशाना साधते हुए उन्हें 'मौन मुख्यमंत्री' करार दिया और कहा कि वे तब भी नहीं बोलते जब 'आसमान सिर पर गिर रहा हो'। इस टिप्पणी पर टीवीके मंत्री आदव अर्जुन ने आक्रामक रुख अपनाते हुए पलटवार किया, जिससे सदन में हंगामा मच गया।

शब्दों और क्षेत्र का टकराव

मुख्यमंत्री की चुप्पी का बचाव करते हुए आदव अर्जुन ने कहा कि मुख्यमंत्री को पता है कि कब और कैसे बोलना है। सदन का तापमान तब और बढ़ गया जब मंत्री ने कोलाथुर का स्पष्ट उल्लेख किया—जो डीएमके नेतृत्व के चुनावी भविष्य पर एक तीखा कटाक्ष था। इस निर्वाचन क्षेत्र का नाम लेते ही पूर्व डीएमके मंत्री शिवंकर और उनके साथी विधायकों ने तुरंत विरोध जताना शुरू कर दिया।

तनाव इतना बढ़ गया कि स्थिति हाथापाई तक पहुँच गई। दोनों पक्षों के सदस्य अपनी सीटों से उठकर एक-दूसरे पर चिल्लाने लगे। मालाई मलार और अन्य प्रमुख सूत्रों के अनुसार, शोर-शराबा इतना तीव्र था कि रॉयपुरम के एक टीवीके विधायक अपनी सीट से आगे बढ़ आए, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। इस हंगामे के कारण कार्यवाही को कुछ देर के लिए रोकना पड़ा, जिसके बाद स्पीकर ने हस्तक्षेप कर व्यवस्था बहाल की।

शिक्षा मंत्री की चेतावनी

अंततः शिक्षा मंत्री राजमोहन ने सदन को संबोधित करते हुए कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा, "अगर आप यहाँ बोलेंगे, तो हमें भी पता है कि उसी भाषा में जवाब कैसे देना है।" उन्होंने सदस्यों से संसदीय गरिमा बनाए रखने और सड़क छाप राजनीति को सदन में न लाने की अपील की। उन्होंने जोर देकर कहा कि सदन को राज्यपाल के अभिभाषण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि अनुत्पादक विवादों में समय बर्बाद करना चाहिए।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

यह घटना तमिलनाडु की विधायी राजनीति में एक नए और अधिक टकराव वाले दौर का संकेत है। 100 से अधिक सदस्यों के साथ टीवीके का एक मजबूत गुट के रूप में प्रवेश ने विधानसभा के पारंपरिक समीकरणों और मिजाज को बदल दिया है। सत्ताधारी डीएमके के लिए यह एक नई चुनौती है: एक ऐसे विपक्ष का प्रबंधन करना जो न केवल संख्या बल में मजबूत है, बल्कि हर नैरेटिव का जवाब देने के लिए तैयार है। जैसे-जैसे सत्र आगे बढ़ेगा, स्पीकर की इन 'अहंकार के टकराव' को नियंत्रित करने की क्षमता ही राज्य में संसदीय स्थिरता की असली परीक्षा होगी।

द्वारा रोहन गुप्ता
बिज़नेस संवाददाता

रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।