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हैदराबाद अपनी ही लापरवाही में डूब रहा, मॉनसून की तैयारियों के दावे खोखले साबित

मॉनसून की पहली बारिश के लिए तैयार नहीं हैदराबाद

द्वारा प्रिया नायरप्रकाशित 12 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
हैदराबाद अपनी ही लापरवाही में डूब रहा, मॉनसून की तैयारियों के दावे खोखले साबित
हैदराबाद अपनी ही लापरवाही में डूब रहा, मॉनसून की तैयारियों के दावे खोखले साबित

तैयारी के आधिकारिक दावों के बावजूद, ड्रेनेज सिस्टम के रखरखाव में शहरव्यापी विफलता ने हैदराबाद को हल्की बारिश में भी बेहाल कर दिया है।

इस हफ्ते गाचीबोवली की लुम्बिनी एवेन्यू का नजारा शहरी अव्यवस्था की एक जानी-पहचानी और डरावनी तस्वीर पेश कर रहा था: बायोडायवर्सिटी जंक्शन के पास घुटनों तक भरे पानी में कारें डूबी हुई थीं और दोपहिया वाहन तैर रहे थे। सोशल मीडिया पर weather Hyderabad की खबरें छाई रहीं, लेकिन जमीनी हकीकत ने साबित कर दिया कि शहर hyd unprepared for monsoon प्रबंधन के मामले में बेहद पीछे है। जैसे ही आसमान से बारिश बरसी, नीचे का बुनियादी ढांचा संघर्ष करता नजर आया, जिसने एक बार फिर प्रशासनिक आश्वासनों और शहर की जर्जर सच्चाई के बीच की खाई को उजागर कर दिया।

जलभराव की असल वजह

समस्या सिर्फ बारिश की तीव्रता नहीं है; बल्कि यह शहर की जीवन रेखाओं को बनाए रखने में हुई व्यवस्थित विफलता है। खैरताबाद की आनंद नगर कॉलोनी से लेकर, जहां विश्वेश्वरैया भवन के पास का नाला गाद और प्लास्टिक कचरे से अटा पड़ा है, शहर भर में नए-नए जलजमाव के केंद्र उभर रहे हैं। रिपोर्टों से पता चलता है कि अधूरे स्टॉर्मवॉटर ड्रेन (तूफानी जल निकासी) के काम और गाद निकालने में कमी ने मामूली बारिश को भी यात्रियों के लिए आफत बना दिया है।

मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि कोर अर्बन रीजन इकोनॉमी (CURE) में जलजमाव के 535 गंभीर पॉइंट हैं, जिनमें से 145 अकेले GHMC सीमा में हैं, जबकि साइबरबाद और मलकजगिरी में ऐसे 390 पॉइंट हैं। भले ही अधिकारी कोथागुडा फ्लाईओवर जैसी जगहों पर सफाई के सफल होने का दावा करें, लेकिन ये इक्का-दुक्का जीत, संकरी और अतिक्रमण की शिकार जल निकासी प्रणालियों की व्यापक उपेक्षा के सामने बौनी साबित हो रही हैं।

रुकी हुई प्रगति का पैटर्न

यह सिर्फ बंद पाइपों की बात नहीं है; यह शासन की बड़ी खामियों को दर्शाता है। चाहे सनतनगर में TIMS अस्पताल के उद्घाटन में बार-बार हो रही देरी हो या नाले के अतिक्रमण को हटाने का संघर्ष, प्रशासन केवल प्रतिक्रियात्मक कदम उठाने के चक्र में फंसा हुआ नजर आता है। भले ही उत्तम जैसे मंत्री जलाशयों और सिंचाई परियोजनाओं की बड़े पैमाने पर सफाई का वादा कर रहे हों, लेकिन सूक्ष्म स्तर पर किया जाने वाला वह रखरखाव—जो किसी सड़क को नदी बनने से रोकता है—शहर भर में उपेक्षित है।

यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर

हैदराबाद के आईटी कॉरिडोर और आवासीय केंद्रों में बार-बार आने वाली बाढ़, बिना पर्याप्त भूमिगत निवेश के तेजी से हो रहे शहरी विस्तार की सीमाओं के बारे में एक सख्त चेतावनी है। जब सतही सौंदर्यीकरण के लिए ड्रेनेज नेटवर्क की अनदेखी की जाती है, तो अंततः इसकी कीमत करदाता को उत्पादकता में नुकसान, वाहनों की क्षति और सुरक्षा जोखिमों के रूप में चुकानी पड़ती है। जब तक हैदराबाद डिजास्टर रिस्पांस एंड एसेट प्रोटेक्शन एजेंसी (HYDRAA) और नगर निकाय मौसमी संकट प्रबंधन से आगे नहीं बढ़ते, तब तक ये बाढ़ की घटनाएं अपवाद नहीं, बल्कि शहर में रहने की स्थायी कीमत बन जाएंगी। MET विभाग की सटीक और कारगर पूर्वानुमान देने में अक्षमता जनता के गुस्से को और बढ़ा रही है, जिससे निवासी एक ऐसे शहर में रहने को मजबूर हैं जो खुद को जल निकासी के लिए भी तैयार नहीं कर पा रहा है।

द्वारा प्रिया नायर
राजनीतिक संवाददाता

प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।