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Alphabet के निवेशकों में हड़कंप: प्रतिभाओं के पलायन और भारी खर्च से डगमगाया भरोसा

सोमवार को Google के शेयरों में 7% से अधिक की गिरावट, कंपनी पर दबाव और बड़े अधिकारियों के इस्तीफे से बढ़ी चिंता

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 23 जून 2026· 3 मिनट पढ़ें
Alphabet के निवेशकों में हड़कंप: प्रतिभाओं के पलायन और भारी खर्च से डगमगाया भरोसा
Alphabet के निवेशकों में हड़कंप: प्रतिभाओं के पलायन और भारी खर्च से डगमगाया भरोसा

सोमवार को Google के शेयरों में 7% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि कंपनी को बड़े अधिकारियों के इस्तीफे और अपनी वित्तीय रणनीति में बड़े बदलाव के कारण भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

सिलिकॉन वैली और दलाल स्ट्रीट का माहौल शायद ही कभी इतना तनावपूर्ण रहा हो, लेकिन सोमवार Alphabet के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। जैसे ही google share price में भारी गिरावट आई और बाजार बंद होने तक यह 7% से अधिक टूट गया, बाजार का संदेश स्पष्ट था: निवेशक अब 'AI हथियारों की दौड़' (AI arms race) को लेकर अपना धैर्य खो रहे हैं। यह एक साल से अधिक समय में कंपनी का सबसे खराब प्रदर्शन है, जो उस टेक दिग्गज के लिए एक बड़ा झटका है जिसने पिछले एक दशक से शेयर बायबैक के जरिए अपनी स्थिरता बनाए रखी थी।

इस बिकवाली का तात्कालिक कारण दोहरी संकट की स्थिति थी। एक ओर, कंपनी की मुख्य शोध इकाइयों से प्रतिभाओं का पलायन जारी है। नोबेल पुरस्कार विजेता जॉन जम्पर और नोआम शाज़ीर जैसे वरिष्ठ शोधकर्ताओं का Anthropic और OpenAI जैसी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों में जाना, इस डर को बढ़ा रहा है कि Google अपनी उस 'बौद्धिक शक्ति' को खो रहा है जिसने उसे हमेशा सबसे आगे रखा था। जब आपकी भविष्य की तकनीक के निर्माता उसे कहीं और बनाने का फैसला करते हैं, तो बाजार स्वाभाविक रूप से आपकी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त पर सवाल उठाने लगता है।

वित्तीय रणनीति में बड़ा बदलाव

प्रतिभाओं के पलायन के साथ-साथ Alphabet की भविष्य की फंडिंग योजना में भी एक आमूलचूल और जोखिम भरा बदलाव आया है। कंपनी ने हाल ही में अपने विशाल AI कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 80 अरब डॉलर की इक्विटी पूंजी जुटाने की घोषणा की है। वर्षों तक, Alphabet शेयर बायबैक के लिए एक भरोसेमंद मशीन रही है, जिसने प्रति शेयर आय (EPS) को बढ़ाने और निवेशकों को खुश रखने में मदद की। अब, उस रणनीति को पूरी तरह से बदल दिया गया है।

बर्कशायर हैथवे की 10 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता के साथ इक्विटी ऑफरिंग की ओर रुख करके, Alphabet यह संकेत दे रही है कि उसे अपने डेटा सेंटरों और कस्टम चिप विकास की भारी मांग को पूरा करने के लिए स्थायी पूंजी की आवश्यकता है। 2026 के लिए पूंजीगत व्यय (Capex) का अनुमान 190 अरब डॉलर तक पहुंचने के साथ, कंपनी वास्तव में एक महंगे दांव पर दोगुना निवेश कर रही है। शेयर डाइल्यूशन (हिस्सेदारी कम होने) की संभावना और खर्च के इस विशाल पैमाने से घबराए निवेशकों ने दिन भर अपने पोर्टफोलियो को फिर से व्यवस्थित किया।

यह क्यों मायने रखता है

बड़ी तस्वीर यह है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मुद्रीकरण (monetization) को लेकर संदेह बढ़ रहा है। हालांकि Google अभी भी नए प्रयोग कर रहा है—जैसे कि A24 फिल्म स्टूडियो के साथ उसकी नई साझेदारी—लेकिन वॉल स्ट्रीट का 'हमें मुनाफा दिखाओ' वाला रवैया इन कदमों पर भारी पड़ रहा है। बाजार अब केवल वादों से संतुष्ट नहीं है; वह यह जांच रहा है कि ये भारी बुनियादी ढांचा लागत वास्तविक सर्च राजस्व में कैसे बदलेगी, खासकर तब जब प्रतियोगी Google के सर्च प्रभुत्व को चुनौती दे रहे हैं।

आम निवेशक के लिए, यह अस्थिरता एक याद दिलाती है कि टेक जगत की सबसे बड़ी कंपनियां भी बाजार के बदलते दबावों से अछूती नहीं हैं। शेयरधारकों को पैसा लौटाने वाली कंपनी से 'कंप्यूट-फर्स्ट' भविष्य बनाने के लिए अरबों डॉलर खर्च करने वाली कंपनी में बदलना एक दर्दनाक प्रक्रिया है। क्या यह एक आवश्यक विकास है या एक अत्यधिक कर्ज में डूबे दिग्गज का संकेत, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या Alphabet यह साबित कर सकती है कि उसके AI उत्पाद केवल महंगे खिलौने नहीं, बल्कि उसकी वृद्धि का अगला इंजन हैं।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।