वीकेंड ट्रेक बना काल: पुणे के पाबे घाट में बस खाई में गिरी, मुंबई के दो पेशेवरों की मौत
मुंबई से ट्रेकिंग पर निकले ऑफिस कर्मचारियों की बस पुणे के पाबे घाट में 50 फीट गहरी खाई में गिरी, 2 की मौत

राजगढ़ किले की एक सामान्य यात्रा रविवार तड़के उस समय त्रासदी में बदल गई, जब एक निजी टूरिस्ट बस अनियंत्रित होकर 50 फीट गहरी खाई में जा गिरी।
रविवार सुबह करीब 2 बजे पुणे जिले के पाबे घाट की शांति उस समय भंग हो गई, जब अंधेरी स्थित एक कंपनी के कर्मचारियों को ले जा रही निजी बस सड़क से नीचे उतर गई। यह समूह मुंबई से निकला था और उन्हें ऐतिहासिक राजगढ़ किले के लिए ट्रेकिंग पर जाना था। लेकिन घाट के एक तीखे मोड़ पर यह यात्रा अचानक थम गई, जहां वाहन सड़क किनारे लगी सुरक्षा रेलिंग को तोड़ते हुए 50 फीट नीचे घाटी में जा गिरा।
स्थानीय अधिकारियों ने दो यात्रियों की मौत की पुष्टि की है: विले पार्ले के 25 वर्षीय विश्वास बाबुराव सतिम और कांदिवली की 23 वर्षीय ध्वनि चंद्रेश ठक्कर। इस हादसे में 18 अन्य यात्री घायल हुए हैं, जिन्हें मामूली चोटों से लेकर सिर में गंभीर चोटें आई हैं। घटना के तुरंत बाद बचाव दल को मौके पर भेजा गया और घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
पुलिस जांच और जवाबदेही
वेल्हे पुलिस ने बस ड्राइवर, 47 वर्षीय संदीप तुकाराम गायकवाड़ के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है, जो अंधेरी ईस्ट का रहने वाला है। यात्री गिरीश रवींद्र जंगम की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है। ड्राइवर पर लापरवाही से गाड़ी चलाने और लापरवाही के कारण मौत का मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस की शुरुआती जांच से पता चलता है कि ड्राइवर घाट के खतरनाक मोड़ों पर वाहन को नियंत्रित करने में विफल रहा। हालांकि अभी यह जांच की जा रही है कि क्या इसमें कोई तकनीकी खराबी थी, लेकिन मौजूदा रिपोर्टों में मानवीय भूल और सड़क की खतरनाक स्थितियों के प्रति सावधानी न बरतने को दुर्घटना का मुख्य कारण माना जा रहा है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: लापरवाही का एक पैटर्न
यह घटना महाराष्ट्र के पहाड़ी रास्तों की एक कड़वी सच्चाई को उजागर करती है। जैसे-जैसे वीकेंड टूरिज्म बढ़ रहा है, अनुभवहीन ड्राइवर, खराब रखरखाव वाली निजी गाड़ियां और सह्याद्री पर्वतमाला की खतरनाक भौगोलिक स्थिति मिलकर एक बड़ा खतरा पैदा कर रहे हैं। अक्सर, ज्यादा ट्रिप करने के चक्कर में थके हुए ड्राइवर रात के समय घुमावदार और कम रोशनी वाले रास्तों पर गाड़ी चलाते हैं, जो आपदा का कारण बनता है।
हालांकि प्रशासनिक प्रतिक्रिया आमतौर पर दुर्घटना के बाद की जांच और एफआईआर तक ही सीमित रहती है, लेकिन पहाड़ी इलाकों में सड़क सुरक्षा का बड़ा मुद्दा अभी भी अनसुलझा है। जब तक इन रास्तों पर गति सीमा का सख्ती से पालन और ड्राइवरों के लिए अनिवार्य आराम का नियम लागू नहीं होगा, तब तक यात्री—चाहे वे ऑफिस के सहकर्मी हों या परिवार—खतरनाक सड़क स्थितियों के भरोसे ही रहेंगे। यह एक सख्त चेतावनी है कि वीकेंड ट्रेक का रोमांच बुनियादी सुरक्षा की कीमत पर नहीं होना चाहिए।
अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।