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एक दिग्गज का भावुक विदाई: शिवचंद्र राम का इस्तीफा, RJD के लिए बड़ा झटका

RJD को बड़ा झटका: इस्तीफा देने के बाद फूट-फूट कर रो पड़े शिवचंद्र राम

द्वारा राष्ट्रीय मामले डेस्कप्रकाशित 8 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
एक दिग्गज का भावुक विदाई: शिवचंद्र राम का इस्तीफा, RJD के लिए बड़ा झटका
एक दिग्गज का भावुक विदाई: शिवचंद्र राम का इस्तीफा, RJD के लिए बड़ा झटका

तीन दशकों से अधिक समय तक पार्टी की सेवा करने वाले बिहार के पूर्व मंत्री की यह भावुक विदाई MLC चुनावों के बीच RJD के भीतर पनप रही दरारों को उजागर करती है।

एक अनुभवी राजनेता का रोना किसी भी पार्टी नेतृत्व के लिए अच्छी छवि नहीं बनाता। सोमवार को पटना के एक प्रेस रूम में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब 1990 से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का हिस्सा रहे पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने की घोषणा की। हाल ही में हुए विधान परिषद (MLC) नामांकन को लेकर अपने साथ हुए 'अन्याय' के बारे में बात करते हुए शिवचंद्र राम कैमरे के सामने खुद को संभाल नहीं पाए और फूट-फूट कर रो पड़े।

इस इस्तीफे का तात्कालिक कारण MLC चुनाव के लिए सुनील सिंह को उम्मीदवार बनाने का पार्टी का फैसला है। तीन दशक से अधिक समय तक पार्टी में रहने वाले नेता के लिए यह नजरअंदाजी किसी धोखे से कम नहीं थी। हालांकि राम ने लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव द्वारा दिए गए अवसरों को याद किया, लेकिन उनकी नाराजगी भारी पड़ गई। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ दिन उनके लिए असहनीय रहे, जिसके चलते उन्हें RJD के SC-ST सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने और संगठन से अपने संबंध पूरी तरह तोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

बढ़ती उपेक्षा की भावना

यह इस्तीफा केवल एक टिकट का मामला नहीं है, बल्कि यह गहरी असंतुष्टि का संकेत है। राम का जाना उस घर्षण को उजागर करता है जो अक्सर चुनाव के मौसम में प्रमुख राजनीतिक दलों में देखने को मिलता है: पुराने वफादारों और उम्मीदवार चयन के बदलते मानदंडों के बीच का अंतर।

अपनी शिकायतों को सार्वजनिक करके, राम ने यह संकेत दिया है कि वह खुद को दरकिनार महसूस कर रहे हैं और नेतृत्व द्वारा किए गए वादे कभी पूरे नहीं किए गए। उनका यह दावा कि उनके समुदाय के लोग विशेष रूप से उनकी उम्मीदवारी का समर्थन करने के लिए पटना आए थे, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी, उनके इस्तीफे में सामाजिक दबाव की एक परत जोड़ता है। दुख का यह सार्वजनिक प्रदर्शन पार्टी के आधार, विशेष रूप से उन समुदायों के बीच, जिन्हें वह प्रतिनिधित्व करते थे, हलचल पैदा कर सकता है।

यह क्यों मायने रखता है

यह घटनाक्रम RJD के लिए एक बड़ा झटका है, जो बिहार MLC चुनावों के हाई-स्टेक माहौल से गुजर रही है। जब तीन दशक पुराना नेता पार्टी छोड़ता है, तो यह केवल एक रिक्ति पैदा नहीं करता, बल्कि आंतरिक संचार और पुरस्कार तंत्र की विफलता को भी दर्शाता है।

RJD नेतृत्व के सामने अब एक कठिन चुनौती है: एक दिग्गज नेता की दर्दनाक विदाई की छवि को संभालना और साथ ही यह सुनिश्चित करना कि MLC अभियान पटरी पर बना रहे। ऐतिहासिक रूप से, इस तरह के इस्तीफे—खासकर जो भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ हों—आंतरिक अस्थिरता के बारे में विपक्ष के नैरेटिव को मजबूत कर सकते हैं। यह एक अलग घटना है या अनुभवी नेताओं के उपेक्षित महसूस करने के चलन की शुरुआत, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि पार्टी आने वाले हफ्तों में अपने घर को कैसे संभालती है। फिलहाल, रोते हुए राम की तस्वीर बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में निहित अस्थिरता की एक स्पष्ट याद दिलाती है।

द्वारा राष्ट्रीय मामले डेस्क
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