सिएटल में रोमांचक मुकाबला: बेल्जियम ने सेनेगल को हराकर वर्ल्ड कप के अगले दौर में बनाई जगह
फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ 32 मैच में बेल्जियम बनाम सेनेगल: कोर्टुआ का पेनल्टी रिकॉर्ड चर्चा में
बेल्जियम ने दो गोल से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए सेनेगल को 3-2 से हराया और वर्ल्ड कप के राउंड ऑफ 32 में पेनल्टी शूटआउट के तनाव से खुद को बचा लिया।
सिएटल स्टेडियम का माहौल बेहद तनावपूर्ण था। जब अतिरिक्त समय खत्म होने वाला था और स्कोर 2-2 पर अटका था, तब पेनल्टी शूटआउट का साया मंडराने लगा था—एक ऐसा लॉटरी सिस्टम जो अनुभवी खिलाड़ियों के धैर्य की भी परीक्षा ले लेता। बेल्जियम के लिए चिंता का विषय थिबाउट कोर्टुआ थे। हालांकि रियल मैड्रिड के यह गोलकीपर विश्व फुटबॉल में एक दिग्गज नाम हैं, लेकिन उन्हें फीफा वर्ल्ड कप में कभी पेनल्टी शूटआउट का सामना न करने का अनूठा दबाव झेलना था।
पेनल्टी किक रोकने में कोर्टुआ का रिकॉर्ड मिला-जुला रहा है। अपने करियर में सामना की गई 79 पेनल्टी में से उन्होंने 13 को रोका है, जिसमें लियोनेल मेसी और आर्सेनल के बुकायो साका जैसे दिग्गजों के खिलाफ किए गए शानदार बचाव शामिल हैं। हालांकि, 34 वर्षीय गोलकीपर 2025-26 सीज़न में थोड़े संघर्ष करते दिखे और उन्होंने सामना की गई छह पेनल्टी में से एक भी नहीं बचाई थी। सेनेगल की आक्रामक खेल को देखते हुए बेल्जियम की टीम जानती थी कि उनकी किस्मत किसी एक पल की चमक या एकाग्रता में चूक पर निर्भर हो सकती है।
मैच का टर्निंग पॉइंट
जब मैच पेनल्टी शूटआउट की ओर बढ़ता दिख रहा था, तभी अंतिम क्षणों में आए एक बदलाव ने टूर्नामेंट की दिशा बदल दी। अतिरिक्त समय के आखिरी मिनटों में बेल्जियम को पेनल्टी मिली, जो उनके लिए जीत का द्वार साबित हुई। यूरी टिलेमैन्स ने भारी दबाव के बावजूद शांत रहते हुए गोल किया और बेल्जियम को 3-2 की बढ़त दिलाई, जिसे उन्होंने अंतिम सीटी बजने तक बरकरार रखा। इस गोल ने न केवल कोर्टुआ को शूटआउट के तनाव से बचाया, बल्कि 'रेड डेविल्स' को राउंड ऑफ 16 में भी पहुंचा दिया।
सेनेगल के लिए यह हार दिल तोड़ने वाली है। मैच की शुरुआत में 2-0 की बढ़त बनाकर उन्होंने उलटफेर की उम्मीद जगा दी थी। लेकिन इसके बाद बेल्जियम की वापसी ने मैच का रुख बदल दिया और सेनेगल की रक्षापंक्ति अंततः अंतिम पेनल्टी के दबाव में बिखर गई।
यह जीत क्यों अहम है
यह मैच इस बात की याद दिलाता है कि फीफा वर्ल्ड कप में जीत-हार का अंतर कितना बारीक होता है। बेल्जियम की अगले दौर में जगह केवल टैक्टिकल परफेक्शन से नहीं, बल्कि दो गोल से पिछड़ने के बाद भी हार न मानने के जज्बे से तय हुई। हालांकि कोर्टुआ का कद निर्विवाद है—चाहे वह 2010 में हंस कॉर्नेलिस के खिलाफ उनका प्रदर्शन हो या 2022 में अल्फोंसो डेविस के खिलाफ किया गया बचाव—यह जीत साबित करती है कि टूर्नामेंट में सफलता के लिए व्यक्तिगत आंकड़ों से परे सामूहिक दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है।
रेड डेविल्स के लिए यह परिणाम एक बड़ा मनोवैज्ञानिक प्रोत्साहन है। सेनेगल जैसी मजबूत टीम के खिलाफ उच्च-तीव्रता वाले मुकाबले से बचने के बाद, वे अगले दौर में काफी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेंगे। अब चुनौती अपनी रक्षात्मक लय को बनाए रखने की है, क्योंकि टूर्नामेंट के अगले चरणों में हर मैच उसी बारीक अंतर के साथ खेला जाएगा जिसने उन्हें सिएटल में लगभग बाहर कर दिया था।
अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।