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बचाव अभियान बना मातम: मैहर में कुएं में उतरने से तीन लोगों की मौत

मैहर न्यूज़: बैल की जान बचाने कुएं में उतरे, दम घुटने से तीन की मौत

द्वारा प्रिया नायरप्रकाशित 4 जुलाई 2026· 2 मिनट पढ़ें
बचाव अभियान बना मातम: मैहर में कुएं में उतरने से तीन लोगों की मौत
बचाव अभियान बना मातम: मैहर में कुएं में उतरने से तीन लोगों की मौत

मध्य प्रदेश के खरमसेड़ा गांव में एक बेजुबान जानवर को बचाने के प्रयास में तीन ग्रामीणों की जान चली गई, जिसने लावारिस पड़े कुओं से जुड़े जानलेवा खतरों को उजागर कर दिया है।

मैहर जिले के अमरपाटन क्षेत्र का छोटा सा खरमसेड़ा गांव इस दुखद घटना के बाद सदमे में है। शुक्रवार शाम को जब एक बैल खेत के पास स्थित 35 फीट गहरे एक पुराने कुएं में गिर गया, तो उसे बचाने के लिए चार ग्रामीण आगे आए। मदद का यह नेक इरादा एक भयावह त्रासदी में बदल गया।

जैसे ही जानवर संघर्ष कर रहा था, पहला ग्रामीण अंधेरे और संकरे कुएं में उतरा। जब उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, तो एक-एक करके अन्य लोग भी नीचे उतर गए, यह जाने बिना कि कुआं एक मौत का जाल बन चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे उपेक्षित कुओं में वेंटिलेशन की कमी होती है, जहां जैविक कचरे के सड़ने से मीथेन और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें जमा हो जाती हैं, जो ऑक्सीजन को खत्म कर देती हैं।

त्रासदी की पूरी कहानी

जैसे ही ग्रामीण कुएं की गहराई में पहुंचे, घटनाक्रम तेजी से बिगड़ा। ऑक्सीजन की कमी के कारण बचाव दल के सदस्य तुरंत बेहोश हो गए। स्थानीय पुलिस के अनुसार, मृतकों की पहचान 28 वर्षीय कृष्ण कुमार यादव, 47 वर्षीय वीरेंद्र यादव और 34 वर्षीय राहुल यादव के रूप में हुई है। एक चौथा ग्रामीण, रामचंद्र यादव, जो कुएं में उतरा था, उसे स्थानीय लोगों ने हुक और रस्सियों की मदद से बाहर निकाल लिया। उसे सतना के जिला अस्पताल में रेफर किया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है।

ग्रामीणों द्वारा किया गया बचाव कार्य बेहद जोखिम भरा था। उपलब्ध संसाधनों—रस्सियों और हुक का उपयोग करके ग्रामीणों ने पीड़ितों को बाहर निकाला। लेकिन जब तक वे अमरपाटन के सिविल अस्पताल पहुंचे, डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया।

यह घटना क्यों महत्वपूर्ण है

यह घटना, जो अब मैहर न्यूज़ की सुर्खियों में है, ग्रामीण बुनियादी ढांचे में छिपे खतरों की एक गंभीर चेतावनी है। भारत के ग्रामीण इलाकों में लावारिस या असुरक्षित कुएं आम हैं, जिन्हें अक्सर तब तक नजरअंदाज किया जाता है जब तक कि कोई बड़ा हादसा न हो जाए।

इस तरह की घटनाएं बार-बार दोहराई जाती हैं: नेक इरादे वाले लोग अक्सर सीमित जगहों (confined spaces) में जहरीली गैसों के खतरों से अनजान होते हैं और उनके पास बचाव के लिए जरूरी उपकरण या प्रशिक्षण नहीं होता। हालांकि स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन यह त्रासदी प्रशासन को ऐसे खतरनाक और अनुपयोगी कुओं को चिन्हित कर उन्हें बंद करने या सुरक्षित करने की सख्त जरूरत की याद दिलाती है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और जन जागरूकता के बिना, ऐसे दिल दहला देने वाले हादसे ग्रामीण सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बने रहेंगे।

द्वारा प्रिया नायर
राजनीतिक संवाददाता

प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।