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एक भूखी टीम: T20 वर्ल्ड कप के अहम पड़ाव पर भारतीय महिला टीम का बदलता स्वरूप

यह टीम हर परिस्थिति में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए भूखी है: महिला टीम के गेंदबाजी कोच सालवी

द्वारा रोहन गुप्ताप्रकाशित 21 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
एक भूखी टीम: T20 वर्ल्ड कप के अहम पड़ाव पर भारतीय महिला टीम का बदलता स्वरूप
एक भूखी टीम: T20 वर्ल्ड कप के अहम पड़ाव पर भारतीय महिला टीम का बदलता स्वरूप

गेंदबाजी कोच आविष्कार सालवी का मानना है कि टीम का विकास अलग-अलग परिस्थितियों में खुद को ढालने की इच्छा से प्रेरित है, भले ही चोटिल खिलाड़ियों की समस्या टीम की गहराई की परीक्षा ले रही हो।

मैनचेस्टर की हवा में ठंडक है, लेकिन भारतीय महिला क्रिकेट टीम पर दबाव तेजी से बढ़ रहा है। पाकिस्तान के खिलाफ 64 रनों की शानदार जीत और नीदरलैंड्स को 95 रनों से करारी शिकस्त देने के बाद, हरमनप्रीत कौर की टीम ने टूर्नामेंट के शुरुआती चरण को बेहद कुशलता से पार किया है। हालांकि, गेंदबाजी कोच आविष्कार सालवी के लिए ये शुरुआती जीतें महज एक शुरुआत हैं। जैसे-जैसे टीम दक्षिण अफ्रीका और बाद में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक निर्णायक सप्ताह के लिए तैयारी कर रही है, पूरा ध्यान उस सामूहिक मानसिकता पर है जिसने विश्व मंच पर टीम के दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल दिया है।

जीत की भूख

पिछले ढाई वर्षों से भारतीय टीम के साथ जुड़े सालवी, इस बदलाव को केवल तकनीक से कहीं आगे का मानते हैं। वे घरेलू वनडे वर्ल्ड कप में मिली जीत को इस नए आत्मविश्वास का मुख्य कारण बताते हैं। प्रोटियाज के खिलाफ मुकाबले से पहले सालवी ने कहा, "यह टीम हर देश में जाकर प्रदर्शन करने के लिए भूखी है।" यह सिर्फ कागजों पर नतीजों के बारे में नहीं है; खिलाड़ी कड़ी मेहनत कर रही हैं और अलग-अलग वातावरण की मांगों के अनुसार अपने खेल को विकसित कर रही हैं। जिस टीम को अक्सर उसकी निरंतरता के लिए आलोचना का सामना करना पड़ता था, उसमें आई यह 'भूख' एक पेशेवर और अनुकूलन योग्य टीम के रूप में उसके परिपक्व होने का संकेत है।

श्रेयंका की कमी और प्रेमा रावत का फैक्टर

हालांकि, टीम के अभियान को एक बड़ा झटका लगा है। टखने की चोट के कारण स्पिनर श्रेयंका पाटिल का बाहर होना भारत के गेंदबाजी संतुलन के लिए एक बड़ा नुकसान है। श्रेयंका टीम की रणनीतिक योजना का एक अहम हिस्सा बन गई थीं, और उनकी अनुपस्थिति ने प्रबंधन को स्पिन-गेंदबाजी रोटेशन पर फिर से सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।

सालवी ने संयम बरतते हुए टीम की 'परिस्थिति के अनुसार रणनीति' पर जोर दिया है, जो अब टीम की पहचान बन गई है। उन्होंने टीम में शामिल की गईं लेग-स्पिनर प्रेमा रावत का समर्थन करते हुए उन्हें एक शानदार प्रतिभा बताया है जो बड़े मंच के लिए तैयार हैं। गेंदबाजी इकाई को व्यक्तिगत प्रतिभा पर निर्भर रखने के बजाय 'फेज बॉलर्स' (चरणबद्ध तरीके से गेंदबाजी करने वाले) के रूप में देखकर, कोचिंग स्टाफ चोटों के प्रभाव को कम करने की उम्मीद कर रहा है।

यह क्यों मायने रखता है

व्यक्तिगत प्रदर्शन पर निर्भर रहने वाली टीम से एक बेहतरीन मशीन की तरह काम करने वाली टीम में बदलना ही एक चैंपियन टीम की असली पहचान है। प्रतिद्वंद्वी की परवाह किए बिना 'गेम टाइम' और अंक जुटाने पर ध्यान केंद्रित करके, भारत दुनिया की शीर्ष टीमों की तरह पेशेवर रुख अपना रहा है। दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आगामी मैच इस सिद्धांत के लिए लिटमस टेस्ट होंगे। यदि वे अपनी मुख्य स्पिनर के बिना भी घरेलू फॉर्म को विदेशी धरती पर दोहरा पाती हैं, तो यह साबित हो जाएगा कि सालवी जिस संस्कृति की बात कर रहे हैं, वह सिर्फ बातें नहीं हैं; बल्कि यह भारतीय महिला क्रिकेट के काम करने के तरीके में आया एक बुनियादी बदलाव है।

द्वारा रोहन गुप्ता
बिज़नेस संवाददाता

रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।