मीरपुर में ऐतिहासिक जीत: मोसादेक और राणा ने ढाका में ऑस्ट्रेलिया को धूल चटाई
बांग्लादेश बनाम ऑस्ट्रेलिया पहला वनडे, मीरपुर, 9 जून 2026: मैच अपडेट्स
मंगलवार को शेर-ए-बांग्ला नेशनल स्टेडियम में बारिश से प्रभावित सीरीज के पहले मुकाबले में बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 21 साल का सूखा खत्म करते हुए 86 रनों से शानदार जीत दर्ज की।
9 जून को मीरपुर के शेर-ए-बांग्ला नेशनल स्टेडियम का माहौल बेहद रोमांचक था, क्योंकि दर्शकों को एक बड़ी टीम को हराने की दुर्लभ उम्मीद दिख रही थी। बांग्लादेश के लिए चुनौती बहुत बड़ी थी: एक ऐसी क्रिकेट पावरहाउस को हराना, जिसका इस फॉर्मेट में हमेशा से दबदबा रहा है। लेकिन जो हुआ वह एक रणनीतिक मास्टरक्लास था, जिसकी अगुवाई एक वापसी करने वाले अनुभवी खिलाड़ी और एक घातक गेंदबाजी आक्रमण ने की, जिसने मेहमान टीम को पूरी तरह पस्त कर दिया।
मोसादेक का मास्टरक्लास
दिन का मुख्य आकर्षण निस्संदेह मोसादेक हुसैन रहे। चार साल के लंबे अंतराल के बाद अंतरराष्ट्रीय टीम में वापसी करने वाले इस ऑलराउंडर ने ऐसा प्रदर्शन किया जैसे वह कभी टीम से बाहर ही नहीं थे। जब टीम मुश्किल स्थिति में थी, तब मोसादेक ने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन मिश्रण पेश किया और महज 70 गेंदों में नाबाद 86 रनों की करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी खेली।
ऑस्ट्रेलिया की फील्डिंग इस दिन काफी खराब रही और उन्होंने मोसादेक को चार बार जीवनदान दिया। मोसादेक ने इसका पूरा फायदा उठाया, स्पिनरों की धुनाई की और निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ मिलकर बांग्लादेश को 284-8 के चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचाया। इससे पहले, ओपनर तंजीद हसन (54) और नजमुल हुसैन शांतो (67) ने टीम को मजबूत नींव दी, जबकि नाथन एलिस ने अनुशासित गेंदबाजी करते हुए 3-38 के आंकड़े दर्ज किए।
दो दशकों में दूसरी जीत
मैच का मोमेंटम दूसरी पारी में भी बरकरार रहा। हालांकि बारिश ने खेल में बाधा डालने की कोशिश की, लेकिन बांग्लादेशी गेंदबाज अपने लक्ष्य पर अडिग रहे। नाहिद राणा की तेज गेंदबाजी ऑस्ट्रेलियाई मध्यक्रम के लिए सिरदर्द साबित हुई और उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए मेहमान टीम को लक्ष्य से काफी दूर रोक दिया। जब आखिरी विकेट गिरा, तो नतीजा साफ था: 86 रनों की एक दमदार जीत, जो इतिहास में दूसरी बार है जब बांग्लादेश ने वनडे में ऑस्ट्रेलिया को हराया है।
यह जीत क्यों मायने रखती है
यह जीत महज एक मैच का नतीजा नहीं है, बल्कि यह एक मनोवैज्ञानिक बाधा को तोड़ने जैसा है। दो दशकों से हेड-टू-हेड रिकॉर्ड का दबाव बांग्लादेशी ड्रेसिंग रूम पर हावी रहता था, जो अक्सर बड़े मैचों में झिझक के रूप में दिखता था। ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम को मात देकर बांग्लादेश ने अपने घरेलू मैदान पर अपना दबदबा साबित कर दिया है। बल्लेबाजी में शुरुआती लड़खड़ाहट के बाद 284 रनों तक पहुंचना मध्यक्रम की नई परिपक्वता को दर्शाता है। जैसे-जैसे सीरीज आगे बढ़ेगी, अब दबाव मेहमान टीम पर है कि वे ढाका की परिस्थितियों के अनुसार खुद को कैसे ढालते हैं, जबकि मेजबान टीम ऐतिहासिक सीरीज जीत पर नजरें गड़ाए हुए है।
अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।