Politicalpedia
विश्व

राजनयिक रस्साकशी: ट्रंप ने ईरान समझौते को बताया आसन्न, तेहरान ने साधी चुप्पी

ट्रंप का दावा रविवार को होगा ईरान समझौते पर हस्ताक्षर; तेहरान ने समयसीमा तय करने से किया इनकार

द्वारा रोहन गुप्ताप्रकाशित 14 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
राजनयिक रस्साकशी: ट्रंप ने ईरान समझौते को बताया आसन्न, तेहरान ने साधी चुप्पी
राजनयिक रस्साकशी: ट्रंप ने ईरान समझौते को बताया आसन्न, तेहरान ने साधी चुप्पी

वाशिंगटन और तेहरान से मिल रहे विरोधाभासी संकेतों के बीच वैश्विक बाजार होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के संभावित समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

इस सप्ताहांत पश्चिम एशियाई संघर्ष को लेकर अनिश्चितता का माहौल और गहरा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान के साथ एक ऐतिहासिक समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर किए जाएंगे। यदि यह समझौता होता है, तो इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए तत्काल खोल दिया जाएगा। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति सोशल मीडिया पर मुखर हैं और कह रहे हैं कि उनके प्रशासन का रुख परमाणु प्रसार के खिलाफ एक 'दीवार' है, लेकिन तेहरान की प्रतिक्रिया जमीनी हकीकत के कहीं अधिक जटिल होने का संकेत देती है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता में चल रही इस राजनयिक कवायद के बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संकेत दिया है कि 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम' अंतिम चरण में है। शरीफ के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुई शत्रुता को समाप्त करने के उद्देश्य से इस समझौते पर 24 घंटे के भीतर इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। हालांकि, वाशिंगटन और इस्लामाबाद का उत्साह तेहरान में पूरी तरह से नहीं दिख रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने सार्वजनिक रूप से सावधानी बरतने का आग्रह किया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि हस्ताक्षर के लिए कोई तारीख तय नहीं की गई है और अमेरिकी खेमे में 'हिचकिचाहट' का हवाला दिया है।

परमाणु कार्यक्रम: मुख्य विवाद

तत्काल संघर्ष विराम से परे, ईरान का परमाणु कार्यक्रम अभी भी विवाद का मुख्य बिंदु बना हुआ है। ट्रंप का मानना है कि 2015 का समझौता अपर्याप्त था। उन्होंने वादा किया है कि उनका प्रशासन ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को नष्ट या कम करने के लिए कदम उठाएगा। दिलचस्प बात यह है कि जहां अमेरिकी राष्ट्रपति का जोर इस बात पर है कि तेहरान को कोई धन जारी नहीं किया जाएगा, वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची पहले ही दावा कर चुके हैं कि संपत्ति को फ्रीज से मुक्त करना समझौते से जुड़ा है। समझौते की वित्तीय शर्तों पर यह मौलिक असहमति बताती है कि यदि रविवार को किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर हो भी जाते हैं, तो भी इसे लागू करने की राह में कई बाधाएं बनी रहेंगी।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए यह बेहद नाजुक क्षण है। होर्मुज जलडमरूमध्य केवल एक समुद्री मार्ग नहीं है, बल्कि यह वैश्विक तेल लॉजिस्टिक्स की धड़कन है। नाकेबंदी हटाने का औपचारिक समझौता उन कमोडिटी बाजारों को बहुत जरूरी राहत देगा, जो संघर्ष शुरू होने के बाद से अस्थिर बने हुए हैं। हालांकि, वाशिंगटन के आत्मविश्वास भरे बयानों और तेहरान के नपे-तुले रुख के बीच का अंतर एक बड़ी राजनयिक खाई को दर्शाता है। यदि रविवार को हस्ताक्षर नहीं होते हैं, तो यह संकेत हो सकता है कि व्यापक दीर्घकालिक शांति के लिए आवश्यक विश्वास अभी भी गायब है, जिससे क्षेत्र अनिश्चितता की स्थिति में बना रहेगा।

जैसे-जैसे दुनिया रविवार का इंतजार कर रही है, बयानों में स्पष्ट विभाजन दिख रहा है। द हिंदू और अल जजीरा जैसे प्रमुख मीडिया संस्थान इस राजनयिक हलचल पर नजर रखे हुए हैं। संबंधित पक्षों के विरोधाभासी बयान याद दिलाते हैं कि उच्च-स्तरीय भू-राजनीति में अंतिम हस्ताक्षर हासिल करना ही सबसे कठिन काम होता है। 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम' हकीकत बनेगा या यह एक और राजनयिक विफलता साबित होगा, इसका फैसला आने वाले कुछ घंटों में हो जाएगा।

द्वारा रोहन गुप्ता
बिज़नेस संवाददाता

रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।