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मैनचेस्टर में मारिजाने कप्प का तूफान, आईसीसी महिला टी20 विश्व कप में भारत को मिली पहली हार

भारत के सात विकेट पर 158 रन

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 22 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
मैनचेस्टर में मारिजाने कप्प का तूफान, आईसीसी महिला टी20 विश्व कप में भारत को मिली पहली हार
मैनचेस्टर में मारिजाने कप्प का तूफान, आईसीसी महिला टी20 विश्व कप में भारत को मिली पहली हार

मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारतीय महिला टीम को छह विकेट से शिकस्त झेलनी पड़ी, जहां मारिजाने कप्प की नाबाद 81 रनों की पारी ने भारत की जीत की राह रोक दी।

मैनचेस्टर की पिच रविवार को उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। असमान उछाल और धीमी सतह पर भारतीय बल्लेबाजों को रन बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने एक चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा करने की कोशिश तो की, लेकिन अंततः 20 ओवर में सात विकेट पर 158 रन तक ही सीमित रह गई। सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा ने आक्रामक रुख अपनाते हुए 15 गेंदों में 31 रन बनाए, जबकि दीप्ति शर्मा (29) और कप्तान हरमनप्रीत कौर (24) ने पारी को संभाला। हालांकि, लगातार गिरते विकेटों ने भारत की लय बिगाड़ दी और टीम बड़े स्कोर तक नहीं पहुंच सकी।

दक्षिण अफ्रीका का पलटवार

159 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी दक्षिण अफ्रीकी टीम की शुरुआत लड़खड़ा गई थी। भारतीय गेंदबाज श्री चरणी ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 24 रन देकर तीन विकेट चटकाए और दक्षिण अफ्रीका को शुरुआती दबाव में ला दिया। लेकिन, मैच का रुख मारिजाने कप्प ने पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने भारतीय गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए 45 गेंदों पर नाबाद 81 रन जड़ दिए। उनकी इस पारी में चार गगनचुंबी छक्के और सात चौके शामिल थे। कप्प के सामने भारतीय गेंदबाजी बेअसर दिखी, खासकर दीप्ति शर्मा काफी महंगी साबित हुईं और उन्होंने अपने चार ओवरों में 44 रन लुटा दिए। दक्षिण अफ्रीका ने 19.1 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया।

हार के मायने: एक विश्लेषणात्मक नजरिया

यह हार आईसीसी महिला टी20 विश्व कप में भारत की पहली पराजय है, जो टीम प्रबंधन के लिए आत्मचिंतन का विषय है। आंकड़ों और हाइलाइट्स (highlights) पर गौर करें तो यह साफ है कि पावरप्ले में अच्छी शुरुआत के बाद मध्यक्रम का लड़खड़ाना और फील्डिंग में कैच टपकाने जैसी बुनियादी गलतियां टीम को भारी पड़ीं। जब पिच असमान व्यवहार कर रही हो, तब अनुशासित गेंदबाजी ही जीत की कुंजी होती है, लेकिन कप्प जैसी बल्लेबाज को सेटल होने देना भारत की रणनीतिक चूक रही।

आगे की राह

अब भारतीय टीम को अपनी गलतियों से सबक लेते हुए आगे देखना होगा। विश्व कप के आगामी मुकाबलों, विशेषकर 25 जून को बांग्लादेश के खिलाफ होने वाले मैच में टीम को अपनी फील्डिंग और डेथ ओवरों की गेंदबाजी पर विशेष ध्यान देना होगा। हालांकि, यह हार टूर्नामेंट का अंत नहीं है, लेकिन इसने यह जरूर स्पष्ट कर दिया है कि खिताबी दौड़ में बने रहने के लिए भारत को अधिक निरंतरता की आवश्यकता है। दक्षिण अफ्रीका की इस जीत ने ग्रुप-ए की गणित को और रोचक बना दिया है।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।