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वेनेज़ुएला में तबाही के बीच संवेदनहीनता का नंगा नाच: लाशों के मलबे पर सेल्फी ले रहे अधिकारी

सड़ रही थी लाशें, अधिकारी ले रहे थे सेल्फी... वेनेजुएला में भूकंप के बाद सरकारी संवेदनहीनता की हद पार

By Kabir SharmaPublished 28 June 2026· 3 min read
वेनेज़ुएला में तबाही के बीच संवेदनहीनता का नंगा नाच: लाशों के मलबे पर सेल्फी ले रहे अधिकारी
वेनेज़ुएला में तबाही के बीच संवेदनहीनता का नंगा नाच: लाशों के मलबे पर सेल्फी ले रहे अधिकारी

वेनेज़ुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद मची अफरा-तफरी के बीच सरकारी अधिकारियों का असंवेदनशील व्यवहार और बचाव कार्यों में भारी ढिलाई ने स्थानीय लोगों के आक्रोश को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

वेनेज़ुएला की धरती पर आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के भूकंप ने जो जख्म दिए हैं, उन्हें भरने के बजाय सरकारी तंत्र की बेरुखी ने उन पर नमक छिड़कने का काम किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक 1,430 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 3,200 से अधिक घायल अस्पताल की दहलीज पर जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। सबसे भयावह स्थिति ला गुआइरा राज्य की है, जहां मलबे के नीचे दबे हजारों लोगों की तलाश अब केवल शवों को ढूंढने के एक दर्दनाक अभियान में तब्दील हो चुकी है।

मलबे पर सेल्फी और परमिट का खेल

आपातकाल के पहले 72 घंटे, जिन्हें किसी भी आपदा में जीवित बचने की संभावना के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, वे बीत चुके हैं। अब ला गुआइरा की हवाओं में सड़ते हुए शवों की दुर्गंध घुली है। ऐसे में जब लोगों को उम्मीद थी कि सरकार और प्रशासन युद्ध स्तर पर राहत कार्य चलाएगा, तो वहां से आई तस्वीरें रोंगटे खड़े करने वाली हैं। आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने आए सरकारी अधिकारी मलबे के ढेर के सामने खड़े होकर मुस्कुराते हुए सेल्फी लेते देखे गए।

स्थिति तब और भी बदतर हो गई जब सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों को सील कर दिया। मलबे के नीचे अपनों को तलाश रहे स्वयंसेवकों और स्थानीय लोगों के लिए 'सुरक्षित प्रवेश पास' लेना अनिवार्य कर दिया गया। एक स्थानीय महिला, जिसने खुद अपने हाथों से अपनी बेटी और दामाद के शव मलबे से निकाले, ने एएफपी को बताया कि मदद के नाम पर वहां कोई नहीं पहुंचा। बिना किसी सरकारी सहायता के, उन्हें अपने प्रियजनों के अंतिम संस्कार की तैयारी खुद ही करनी पड़ी।

एक मानवीय संकट का आईना

यह केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक विफलता का बड़ा उदाहरण है। जब आपदा के बाद के संवेदनशील समय में प्रशासन लोगों को राहत देने के बजाय सेल्फी और कागजी परमिट के जाल में उलझाता है, तो जनता का भरोसा पूरी तरह टूट जाता है। ला गुआइरा में मास्क पहने घूमते लोग और अपनों को खोने का मातम इस बात का गवाह है कि वेनेज़ुएला के लिए यह त्रासदी केवल भूकंप से नहीं, बल्कि तंत्र की सुस्ती से भी उपजी है।

क्यों यह मायने रखता है

इस घटना का विश्लेषण करें तो यह आपदा प्रबंधन में 'मानवीय तत्व' की कमी को दर्शाता है। किसी भी बड़े संकट में, जब सरकारी तंत्र का ध्यान अपनी छवि चमकाने या प्रोटोकॉल पालन पर अधिक हो जाता है, तो वहां जमीनी स्तर पर काम ठप पड़ जाता है। ला गुआइरा की तस्वीरें वैश्विक समुदाय के लिए एक सबक हैं कि आपदा के दौरान अधिकारियों की जवाबदेही केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर दिखनी चाहिए। प्रशासन की यह असंवेदनशीलता न केवल जनता के गुस्से को भड़काती है, बल्कि आने वाले समय में राहत कार्यों के लिए स्वयंसेवकों के उत्साह को भी खत्म कर देती है।

By Kabir Sharma
Features Writer

Kabir Sharma writes on culture, technology and everyday life for PoliticalPedia.