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इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण का विज्ञापन: सरकार ने मेटा को भेजा नोटिस

भारत में इंस्टाग्राम पर चल रहा बच्चों के यौन शोषण का ऐड, सरकार ने भेजा नोटिस

By Arjun MehtaPublished 3 July 2026· 3 min read
इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण का विज्ञापन: सरकार ने मेटा को भेजा नोटिस
इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण का विज्ञापन: सरकार ने मेटा को भेजा नोटिस

बीबीसी की एक जांच में सामने आए गंभीर खुलासों के बाद केंद्र सरकार ने मेटा से जवाब तलब किया है कि इंस्टाग्राम पर चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज मेटेरियल के विज्ञापन कैसे चल रहे थे।

दिल्ली के सरकारी गलियारों में इस समय मेटा के मॉडरेशन सिस्टम को लेकर गहरी नाराजगी है। हाल ही में एक बीबीसी (BBC) की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि भारत में इंस्टाग्राम पर बाकायदा पेड advertisement चलाए जा रहे थे, जो सीधे तौर पर बच्चों के यौन शोषण (CSAM) से जुड़े थे। इन विज्ञापनों में 'रेप वीडियो' और 'चाइल्ड वीडियो' जैसे बेहद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। इस primary source रिपोर्ट के सामने आते ही इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सख्त रुख अपनाते हुए कंपनी को तलब कर लिया है।

मंत्रालय अब मेटा से यह सवाल पूछने की तैयारी में है कि आखिर इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा के इतने कड़े दावों के बावजूद ऐसे विज्ञापन कैसे लाइव हो गए। सूत्रों के मुताबिक, सरकार कंपनी से यह भी जवाब मांगेगी कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए उनके पास क्या ठोस सुरक्षा उपाय हैं। Multiple outlets पर इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए, यह साफ है कि केंद्र अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट मॉडरेशन को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

सिस्टम की नाकामी या मिलीभगत?

जांच में जो बातें सामने आई हैं, वे बेहद चौंकाने वाली हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जब इन विज्ञापनों पर क्लिक किया जाता था, तो यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों पर रीडायरेक्ट कर दिया जाता था, जहां बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट कम कीमत पर बेचा जा रहा था। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इंस्टाग्राम का दावा है कि उनके प्लेटफॉर्म पर चलने वाला हर विज्ञापन एक मॉडरेशन सिस्टम से गुजरता है। इसके बावजूद, जब रिपोर्टर्स ने एक विज्ञापन की शिकायत की, तो इंस्टाग्राम ने 24 घंटे बाद जवाब दिया कि यह पोस्ट उनकी कम्युनिटी गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं करती।

बाद में मेटा ने स्वीकार किया कि उनका मॉडरेशन सिस्टम "परफेक्ट नहीं है" और उन्होंने उन विज्ञापनों व अकाउंट्स को हटा दिया है। हालांकि, यह सफाई सरकारी अधिकारियों के लिए नाकाफी है। जांच में ऐसे करीब 30 विज्ञापन सिर्फ बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मिले, जबकि 20 अन्य विज्ञापन एडल्ट अश्लील सामग्री को बढ़ावा दे रहे थे।

Why it matters: एक बड़ा डिजिटल संकट

यह मामला महज एक तकनीकी चूक नहीं, बल्कि डिजिटल सुरक्षा के एक बड़े पैटर्न की ओर इशारा करता है। जब बड़े प्लेटफॉर्म्स का एल्गोरिदम मुनाफे के लिए कंटेंट को प्रमोट करता है, तो वहां 'सेफ्टी फिल्टर' अक्सर दरकिनार कर दिए जाते हैं। भारत जैसे बड़े डिजिटल बाजार में, जहां करोड़ों बच्चे सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं, वहां इस तरह की खामियां राष्ट्रीय सुरक्षा और बाल अधिकारों के लिए एक गंभीर खतरा हैं।

सरकारी हस्तक्षेप का मतलब है कि अब मेटा को अपने 'सेल्फ-रेगुलेशन' दावों का ऑडिट कराना पड़ सकता है। यह घटना दर्शाती है कि केवल कंटेंट हटाने (take-down) की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस सिस्टम की जवाबदेही तय करना जरूरी है, जो ऐसे विज्ञापनों को अप्रूव ही कैसे कर देता है। आने वाले दिनों में MeitY की सख्ती यह तय करेगी कि क्या टेक कंपनियां भारत में अपने नियमों को और अधिक कड़ा करेंगी या उन्हें कानून के जरिए बाध्य होना पड़ेगा।

By Arjun Mehta
National Affairs Correspondent

Arjun Mehta reports on government, policy and Parliament for PoliticalPedia, in English and Hindi.