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ढाका में इतिहास का दोहराव: बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को 86 रन से हराकर रचा नया अध्याय

क्रिकेट में हुआ बड़ा उलटफेर... बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को 86 रन से चटाई धूल 21 साल

By Arjun MehtaPublished 11 June 2026· 2 min read
ढाका में इतिहास का दोहराव: बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को 86 रन से हराकर रचा नया अध्याय
ढाका में इतिहास का दोहराव: बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को 86 रन से हराकर रचा नया अध्याय

शेर-ए-बांग्ला स्टेडियम में मेजबान टीम ने ऑस्ट्रेलिया बनाम बांगलादेश मुकाबले में 21 साल का सूखा खत्म करते हुए एक यादगार जीत दर्ज की।

ढाका का शेर-ए-बांग्ला नेशनल स्टेडियम मंगलवार को उस मंजर का गवाह बना जिसकी उम्मीद शायद ही किसी क्रिकेट पंडित ने की थी। ऑस्ट्रेलिया जैसी विश्व चैंपियन टीम के खिलाफ बांग्लादेश का वनडे में पलड़ा हमेशा भारी दबाव में रहता है, लेकिन इस बार कहानी अलग थी। DLS पद्धति से मिली 86 रन की जीत ने न केवल सीरीज में मेजबान टीम को बढ़त दिलाई, बल्कि दो दशक से चले आ रहे मनोवैज्ञानिक दबाव को भी तोड़ दिया।

बल्लेबाजों का दम और राणा की धार

टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी बांग्लादेशी टीम ने शुरू से ही आक्रामक रुख अपनाया। मोसाद्देक हुसैन ने मध्यक्रम में जिम्मेदारी संभालते हुए 70 गेंदों में 86 रनों की शानदार पारी खेली। उन्हें नजमुल हुसैन शांतो (67) और तन्जीद हसन तमीम (54) का बखूबी साथ मिला। बोर्ड पर 284 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा कर बांग्लादेश ने साफ कर दिया था कि वे इस बार कड़ी टक्कर देने के मूड में हैं।

जब ऑस्ट्रेलिया रन चेज के लिए उतरी, तो बांग्लादेश के तेज गेंदबाज नाहिद राणा ने कंगारू बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। ऑस्ट्रेलियाई टीम की शुरुआत किसी बुरे सपने जैसी रही। पहले ही ओवर से विकेट गिरने का जो सिलसिला शुरू हुआ, उसने मेहमान टीम को बैकफुट पर धकेल दिया। 156 रन पर 9 विकेट गंवा चुकी ऑस्ट्रेलिया के लिए कैमरून ग्रीन की नाबाद 52 रनों की पारी सिर्फ हार का अंतर कम कर सकी। बारिश ने खेल रोका, लेकिन तब तक बांग्लादेश जीत की दहलीज पार कर चुका था।

21 साल का लंबा इंतजार

यह जीत महज एक मैच की कामयाबी नहीं है। आंकड़ों पर नजर डालें तो ऑस्ट्रेलिया बनाम बांगलादेश के बीच अब तक खेले गए कुल 23 मुकाबलों में यह बांग्लादेश की मात्र दूसरी जीत है। आखिरी बार उन्होंने 2005 में कंगारुओं को धूल चटाई थी। 21 साल के लंबे अंतराल के बाद मिली यह जीत बांग्लादेशी क्रिकेट के लिए एक मील का पत्थर है, जो टीम के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई पर ले जाएगी।

क्यों मायने रखती है यह जीत

क्रिकेट के गलियारों में इसे एक बड़े उलटफेर के तौर पर देखा जा रहा है। यह परिणाम न केवल आईसीसी रैंकिंग के समीकरणों को प्रभावित करेगा, बल्कि यह भी दिखाता है कि घरेलू परिस्थितियों का सही इस्तेमाल कैसे किया जाता है। ऑस्ट्रेलिया के लिए यह एक चेतावनी है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब कोई भी टीम 'छोटी' नहीं रही। बांग्लादेश की इस जीत ने साबित कर दिया है कि अनुशासित गेंदबाजी और धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी के दम पर किसी भी दिग्गज टीम के वर्चस्व को चुनौती दी जा सकती है। अब सबकी निगाहें सीरीज के अगले मैचों पर हैं कि क्या ऑस्ट्रेलिया अपनी गलतियों से सीखकर वापसी कर पाती है, या बांग्लादेश इस ऐतिहासिक लय को बरकरार रखता है।

By Arjun Mehta
National Affairs Correspondent

Arjun Mehta reports on government, policy and Parliament for PoliticalPedia, in English and Hindi.